अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) ने भारत सहित दुनिया के 60 देशों से आने वाले सामानों पर 10 से 12.5 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का एक बड़ा प्रस्ताव दिया है. USTR की धारा 301 के तहत आई एक जांच रिपोर्ट के बाद यह कदम उठाया गया है, जिसमें कहा गया है कि ये देश अपने यहाँ जबरन श्रम से बनने वाले सामानों के इस्तेमाल और व्यापार को रोकने में नाकाम रहे हैं. यह खबर ऐसे समय में आई है जब दोनों देशों के बीच व्यापारिक बातचीत के लिए एक अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल भारत के तीन दिवसीय दौरे पर है. हाल ही में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भी भारत की यात्रा की थी.
अतिरिक्त टैरिफ पर अमेरिका का पक्ष
अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जेमिसन ग्रीर का कहना है कि उनके सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार भी जबरन श्रम के मुद्दे को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं. इससे अमेरिकी श्रमिकों को वैश्विक बाजार में अनुचित और असमान प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है, जिसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. गौरतलब है कि अमेरिका अपने कुल आयात का लगभग 99.40 प्रतिशत हिस्सा इन्हीं 60 देशों से मंगवाता है.
टैरिफ को दो श्रेणियों में बांटा गया है
10 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ: उन अर्थव्यवस्थाओं पर लगेगा जिन्होंने जबरन श्रम के खिलाफ कुछ कानूनी कदम उठाए हैं, व्यापार समझौतों में वादे किए हैं या आंशिक व्यवस्थाएं लागू की हैं. भारत इसी श्रेणी में शामिल है.
12.5 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ: यह उन छह देशों पर लगेगा जो इस कानूनी ढांचे को पूरी तरह लागू करने में नाकाम रहे हैं, जिनमें कनाडा, मेक्सिको, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, इक्वाडोर और यूरोपीय संघ के देश शामिल हैं.
इसके अलावा, टेक्सटाइल सेक्टर के लिए एक विशेष व्यवस्था का प्रस्ताव है, जिसके तहत तय मात्रा में कपड़ों और टेक्सटाइल प्रोडक्ट्स को कम टैरिफ पर अमेरिका में प्रवेश की अनुमति मिल सकती है. हालांकि, फेडरल रजिस्टर नोटिस के अनुबंध ‘A’ में शामिल उत्पादों को इस दायरे से छूट दी जाएगी।
ट्रंप की टैरिफ नीति और अदालती झटका
यह पूरा घटनाक्रम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस व्यापक टैरिफ व्यवस्था को दोबारा जिंदा करने की कोशिश माना जा रहा है, जिसे इस साल फरवरी में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने गैर-कानूनी घोषित कर दिया था. इससे पहले, 2 अप्रैल 2025 को राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत सहित 100 देशों पर पारस्परिक टैरिफ (Reciprocal Tariff) लगाने की घोषणा की थी, जिसका सीधा नियम था ‘जैसे को तैसा’. यानी अगर कोई देश अमेरिकी सामानों पर भारी टैक्स लगाएगा, तो अमेरिका भी बदले में उसके सामानों पर उतना ही टैक्स ठोकेगा. सुप्रीम कोर्ट से झटका लगने के बाद अब इस नई रिपोर्ट को एक वैकल्पिक रास्ते के रूप में देखा जा रहा है.
राहत की बात और भारत का रुख
राहत की बात यह है कि ये टैरिफ तुरंत लागू नहीं हो रहे हैं. अमेरिका ने इस पर सार्वजनिक राय और समीक्षा प्रक्रिया की बात कही है. लिखित आपत्तियां दर्ज कराने की आखिरी तारीख 6 जुलाई है, जिसके बाद 7 जुलाई से इस पर सार्वजनिक सुनवाई शुरू होगी.
इस पूरे मामले पर भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने अपनी पैनी नजर बनाई हुई है. भारतीय वाणिज्य मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा है कि वे धारा 301 की इस पूरी प्रक्रिया और नए प्रस्तावों को लेकर अमेरिकी प्रशासन के साथ लगातार संपर्क में हैं, ताकि भारतीय हितों की रक्षा की जा सके.