मॉस्को/वॉशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वर्ल्ड ट्रेड अॉर्गनाइजेशन (डब्ल्यूटीओ) छोड़ने की धमकी दी है. ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के साथ भेदभाव किया जा रहा है. ट्रंप की इस धमकी के बाद रूस ने कहा कि अगर अमेरिका नियमों के मुताबिक नहीं चलेगा तो उसे आर्थिक तौर पर नुकसान सहना पड़ेगा.

डब्ल्यूटीओ की स्थापना देशों के विवादों को खत्म करने और वैश्विक व्यापार के नियम तय करने के लिए किया गया था. ट्रंप ने कहा कि यह संस्था अमेरिका के खिलाफ आदेश देती है. इसी साल फॉक्स न्यूज से बातचीत में ट्रंप ने दावा किया था कि डब्ल्यूटीओ की स्थापना ‘सभी को फायदा पहुंचाने’ के लिए किया गया, लेकिन अमेरिका ने डब्ल्यूटीओ में सारे केस हारे.

ट्रंप की डब्ल्यूटीओ छोड़ने की चेतावनी उनके संरक्षणवादी व्यापार नीतियों और डब्ल्यूटीओ की खुली व्यापार प्रणाली के बीच संघर्ष को जाहिर करती है. वॉशिंगटन ने हाल ही में डब्ल्यूटीओ में जिनेवा की विवाद निपटाने वाली संस्था में नए जजों की नियुक्ति पर प्रतिबंध लगा दिया है, जिससे उसके आदेश पारित करने की व्यवस्था चरमरा सकती है.

डब्ल्यूटीओ को नापसंद क्यों करते हैं ट्रंप: राष्ट्रपति बनने से पहले ट्रंप डब्ल्यूटीओ की आलोचना करते रहे हैं. ट्रंप ने हमेशा डब्ल्यूटीओ पर गलत तरीके से व्यापार करने के आरोप लगाए हैं. गुरुवार को ट्रंप ने कहा कि 1994 में डब्ल्यूटीओ की स्थापना करने का समझौता अब तक का सबसे खराब व्यापार सौदा है.

हाल ही के महीनों में अमेरिका का कई व्यापारिक मंचों पर जैसे को तैसा वाली स्थिति चल रही है. अमेरिका के सामने चीन भी एक मजबूत अर्थव्यवस्था के तौर पर उभर रहा है. अमेरिका में आयात होने वाले सामान पर भी ट्रंप ने टैक्स बढ़ा दिया है.

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