नई दिल्ली. जम्मू-कश्मीर से धारा 370 और अनुच्छेद 35 ए हटाने के फैसले पर संयुक्त राज्य अमेरिका की भी नजर थी. इसी क्रम में अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मॉर्गन ओर्टागस ने सोमवार को मीडिया से बात करते हुए कहा हमने जम्मू कश्मीर के संवैधानिक दर्जे में तब्दीली की भारत की घोषणा और राज्य को दो केन्द्रशासित प्रदेशों में बांटने की योजना को संज्ञान में लिया है. भारत ने जम्मू-कश्मीर के मुद्दे को आंतरिक मामला बताया है. हम भी जम्मू-कश्मीर में रहने वाले लोगों के मानवाधिकारों के कथित उल्लंघन पर चिंता जताते हैं और लोगों के अधिकारों के सम्मान तथा प्रभावित समुदायों से चर्चा की अपील करते हैं.

इसके साथ ही अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मोर्गन ओर्टागस ने मीडिया से बात करते हुए कहा- हम भारत और दूसरे पक्ष (पाकिस्तान) से अपील करते हैं कि वह नियंत्रण रेखा पर शांति और स्थिरता बनाए रखें.बीजेपी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 35 (ए) के साथ धारा 370 को रद्द कर दिया और जम्मू-कश्मीर को एक केंद्र शासित प्रदेश में बदलने का प्रस्ताव किया जबकि विधायिका के बिना एक अलग केंद्र शासित प्रदेश के रूप में लद्दाख एक नया राज्य बना दिया है.

भारत के गृह मंत्री अमित शाह द्वारा राज्यसभा या संसद के उच्च सदन में धारा 370 और अनुच्छेद 35 ए के प्रस्ताव पेश किए जाने के कुछ ही समय बाद राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद एक अधिसूचना लेकर आए और इसके तुरंत बाद ही कश्मीर में यह आदेश लागू हो गया. इस प्रस्ताव से पहले कश्मीर में भारी सुरक्षा का इंतजाम किया गया था जिससे कोई हंगामा न हो.

इसके साथ ही सरकार ने अमरनाथ यात्रियों और पर्यटकों को एक एडवाइजरी जारी की जिसमें उन्होंने साफ कह दिया कि अमरनाथ यात्रा दी गई है और जल्द से जल्द घाटी को खाली पर्यटक भी खाली कर दें. वहीं जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्रियों उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती सहित कई नेताओं ने दावा किया था कि उन्हें घर में नजरबंद कर दिया गया है और राज्य में तनावपूर्ण स्थिति है. 

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