वाशिंगटनः अमेरिका में मध्यावधि चुनाव चल रहे हैं. हालांकि यह एक पूर्ण चुनाव होते हैं लेकिन चूंकि ये राष्ट्रपति के अर्धकार्यकाल के दौरान होती है इसलिए इसे मध्यावधि यानी मिडटर्म चुनाव भी कहा जाता है. इन चुनावों में हॉउस ऑफ रिप्रजेन्टेटिव के कुल 435 सीटों और सीनेट के लगभग एक तिहाई सीटों यानी 100 में से 35 सीटों पर चुनाव हो रहे हैं. इन चुनावों में राष्ट्रपति डोनॉल्ड ट्रंप की प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता भी दांव पर लगी है. इन चुनावों को राष्ट्रपति के कार्यों का मूल्यांकन चुनाव कहा जाता है और अक्सर देखा जाता है कि इन चुनावों में सत्तारूढ़ पार्टी को नुकसान होता है.

2012 के मिड टर्म चुनावों में तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा की पार्टी डेमोक्रेटिक को काफी नुकसान हुआ था. कहा जा रहा है कि अगर इन चुनावों में राष्ट्रपति डोनॉल्ड ट्रंप की पार्टी रिपब्लिकन को नुकसान होता है तो इसका प्रभाव इस शासन द्वारा कानून बनाने में भी हो सकता है. अगर रिपब्लिकन पार्टी को हॉउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव में नुकसान होता है तो कानून बनाने में ट्रंप शासन को दिक्कतें आ सकती हैं, वहीं अगर सीनेट में नुकसान होता है तो इससे उस कानून को पास कराने में दिक्कतें होंगी. हो सकता है कि विपक्षी पार्टी राष्ट्रपति डोनॉल्ड ट्रंप के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव भी लाए हालांकि इसके लिए उन्हें सीनेट में दो तिहाई सीटों की जरूरत होगी जो कि नामुमकिन है.

आपको बता दें कि लोअर हॉउस, ‘हॉउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव’ में 435 सीटों में विपक्षी दल डेमोक्रेटिक पार्टी के पास अभी सिर्फ 195 सीट है और उसे बहुमत के 218 सीटों के लिए 23 सीटों की जरूरत है. उन्हें उम्मीद है कि वह इसे प्राप्तकर सकेंगे. वहीं सीनेट में जिन 35 सीटों पर चुनाव होना है उसमें से सिर्फ 9 सत्तारूढ़ दल रिपलब्किन के पास हैं. जबकि 24 डेमोक्रेटिक के पास हैं. इस तरह सीनेट के चुनाव परिणाम कैसे भी हो नुकसान डेमोक्रेट्स को ही होगा क्योंकि वह अधिक सीट खाली कर रहे हैं.

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