नई दिल्ली: ब्रिटेन की प्रधानमंत्री थेरेसा में ने अविश्वास प्रस्ताव जीत लिया है. ब्रिटेन की संसद ने ब्रेक्जिट समझौता मंगलवार को खारिज  कर दिया था. इसके बाद से देश के यूरोपीय संघ से अलग होने की योजना पर और ज्यादा संशय के बादल मंडराने लगे थे. अविश्वास प्रस्ताव को लेकर थेरेसा मे के पक्ष में 325 वोट पड़े जबकि विपक्ष में 306 वोट पड़े. अगर थेरेसा मे अविश्वास प्रस्ताव हार जाती तो यूरोपीय संघ छोड़ने से पहले ही उनको एक सप्ताह के भीतर चुनाव का सामना करना पड़ता. अविश्वास प्रस्ताव जीतने के साथ थेरेसा मे की सरकार गिरने की संभावना पूरी तरह से खत्म हो गई है.

ब्रिटेन  नागरिकों  की दमन के बावजूद भी थेरेसा मे को यूरोपीय संघ से बाहर निकलने के लिए विरोध का सामना करना पड़ रहा है. मंगलवार को ब्रेक्सिट समझौते पर हुई वोटिंग के दौरान थेरेसा मे की करारी हार हुई थी. ब्रिटिश सरकार और ईयू के बीच समझौते को लेकर हुई वोटिंग में पक्ष में सिर्फ 202 वोट पड़े थे, जबकि विपक्ष को कुल 432 वोट मिला था. ईयू से ब्रिटेन के अलग होने की तारीख 29 मार्च रखी गई है. ब्रेक्जिट वोटिंग के दौरान थेरेसा मे का उनके ही सांसदों ने कई वजह से विरोध किया था. हार के बाद थेरेसा मे ने अपने सांसदों से इस मुद्दे पर फिर से सोचने को कहा था. थेरेसा मे ने यह भी कहा था कि हम अपने देश के नागरिकों की भलाई के लिए यूरोपीय संघ से अलग हो रहे हैं. इसके पीछे कोई राजनीतिक सोच नहीं है.

ब्रिटेन 1973 में यूरोपीय संघ में शामिल हुआ था. यूरोपीय संघ में कुल 28 देश हैं. नवंबर में ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से अलग होने की सहमति बनी थी. दिसंबर में निचली सदन में इसको लेकर मतदान भी होना था लेकिन थेरेसा मे की हार की वजह से ऐसा नहीं पाया था. इसके बाद से ही वो सांसदों को मनाने में जुटी थी.

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