नई दिल्ली। श्रीलंका में आपातकाल के बीच राजनीतिक अनिश्चितता का दौर जारी है. इस बीच देश की मुख्य विपक्षी पार्टी एसजेबी ने राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है. जिसमें उन्होंने एसजेबी नेता सजिथ प्रेमदास को अंतरिम गठबंधन सरकार का नेतृत्व करने की पेशकश की. इन गतिविधियों के बीच देश में सरकार विरोधी प्रदर्शन भी थमने का नाम नहीं ले रहे हैं.

राष्ट्रीय संयोजक की घोषणा

समागी जन बालवेग्य पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक टिस्सा अतनायके ने अपनी प्रेस वार्ता में बताया कि हमारे नेता ने राष्ट्रपति राजपक्षे के प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है.।आपको बता दें कि अंतरिम सरकार बनाने की संभावनाओं का पता लगाने के लिए राजपक्षे ने प्रेमदासा और अन्य महत्वपूर्ण नेता हर्ष डी सिल्वा दोनों को बुलाया था. इस बीच।शक्तिशाली बौद्ध भिक्षुओं के साथ-साथ श्रीलंका पोदुजाना पेरामुना (एसएलपीपी) के नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ गठबंधन से अलग होने वाले समूहों ने अंतरिम सरकार के गठन की मांग का समर्थन किया है.

पेंच कहाँ फंसा है?

इस बीच, एसजेबी ने घोषणा की है कि उनकी पार्टी नेशनल एसोसिएशन ऑफ लॉयर्स (बीएएसएल) के 18 महीने के कार्यकाल के लिए अंतरिम सरकार बनाने के प्रस्ताव का समर्थन करेगी, जिसमें राष्ट्रपति प्रणाली को खत्म किया जाएगा. कहा जा रहा है कि राष्ट्रपति गोटाबाया इन मांगों से सहमत नहीं हैं और इसीलिए देश में गठबंधन सरकार के गठन का रास्ता साफ नहीं हो रहा है.

गौरतलब है कि एसजेबी ने संविधान के 20वें संशोधन को निरस्त करने की भी मांग की है. जिसने 2020 में राजपक्षे को अधिक अधिकार दिए.बार एसोसिएशन ऑफ श्रीलंका (बीएएसएल) ने संविधान में 19वें संशोधन को बहाल करने की मांग की है, जिसने राष्ट्रपति की तुलना में संसद को अधिक अधिकार दिए. एसजेबी नेता हरिन फर्नांडो ने कहा कि एसजेबी बीएएसएल के साथ प्रस्ताव पर चर्चा करेगा.

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