नई दिल्ली, श्रीलंका में आपातकाल लागू होने के बाद भी लोग सड़कों पर उतरकर हिंसक प्रदर्शन कर रहे हैं. जगह-जगह वाहन जलाए जा रहे हैं, ऐसे हिंसक विरोध को दबाने के लिए रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को शूट ऑन साइट (देखते ही गोली मार देना) का आदेश भी जारी कर दिया है, लेकिन फिर भी दंगाई पीछे नहीं हट रहे हैं. सोमवार हो हुई हिंसा में सांसद समेत पांच लोगों की मौत की खबर आई है.

मालूम हो कि सोमवार को श्रीलंका में महिंदा राजपक्षे ने सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों पर हमला करने और हिंसा फैलाने के बाद प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. इस्तीफे के बाद उनके समर्थकों ने और ज्यादा हिंसा फैलानी शुरू कर दी.

रोक दें हिंसा- राष्ट्रपति

श्रीलंका में बिगड़ते हालातों को देखते हुए राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे ने ट्विटर पर प्रदर्शनकारियों से अपील कि वे चाहे जिस भी पार्टी हों लेकिन वे शांत रहें और हिंसा रोक दें. नागरिकों के खिलाफ बदले की कार्रवाई न करें, उन्होंने कहा कि संवैधानिक जनादेश और आम सहमति के जरिए राजनीतिक स्थिरता बहाल करने और आर्थिक संकट को दूर करने की सभी कोशिशें की जा रही हैं, लेकिन हिंसा से कोई समाधान नहीं निकलने वाला.

बढ़ी हिंसा

एक ओर जहाँ राजनीतिक दबाव में आकर राजपक्षे ने इस्तीफ़ा दे दिया है तो वहीं दूसरी तरफ, श्रीलंका के कई हिस्सों में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पों की खबरें सामने आ रही हैं. श्रीलंका पर पहले ही आर्थिक संकट मंडरा रहा था, लेकिन महिंदा के इस्तीफे से अब श्रीलंका पर दोहरा खतरा आ गया है. दरअसल, राजपक्षे के बड़े भाई और राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे नहीं चाहते थे कि महिंदा इस्तीफा दें, लेकिन विपक्ष की मांग के आगे उन्हें झुकना पड़ा और उन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया. दूसरी तरफ, उन्होंने अपने समर्थकों को सड़कों पर उतार दिया, अब राजपक्षे भाईयों के विरोधियों और समर्थकों के बीच देश के कई हिस्सों हिंसक झड़प शुरू हो गई है. इस झड़प में अब तक 78 लोगों के घायल होने की भी खबरें हैं.

 

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