कोलंबो. श्रीलंका की राजधानी में रविवार को सुबह ईस्टर के मौके पर पांच जगहों पर बम धमाके हुए हैं जिसमें 80 लोग घायल बताए जा रहे हैं. दो जगह बम धमाके चर्च में हुए हैं जिसमें एक विस्‍फोट कोच्चिकाडे स्थित सेंट एंथोनी चर्च और दूसरा धमाका नेगोम्‍बो कतुवापिटिया सेंट सबास्टियन चर्च में हुआ है. इसके साथ ही कोलंबो के किंग्‍सबरी होटल, शांगरीला होटल और बट्टिकलोवा में बम धमाके हुए हैं.

श्रीलंका में इससे पहले भी कई धमाके हुए हैं जिसमें कई लोगों की जानें गई हैं, जिनमें से अधिकतर धमाके तमिल आतंकी संगठन लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) ने किए हैं. हम आपके बताते हैं कि आखिर कब इसकी शुरूआत हुई और कब तक यह बम धमाके थमे.

वेलुपिल्लई प्रभाकरन ने मई 1976 में लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम संगठन की स्थापना की जिसका उद्देश्य श्रीलंका के उत्तर और पूर्व में तमिल ईलम का एक स्वतंत्र राज्य बनाने का था. इस वजह से सरकार और संगठन के बीच युद्ध भी हुए जिसका नुकसान जनता को होता है. हालांकि श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे की अध्यक्षता में साल 2009 में इसे घुटने टेकने पड़े. इससे पहले लिट्टे ने श्रीलंका की धरती को खून से रंग दिया था.

लिट्टे द्वारा पहली बार आत्मघाती बम विस्फोट साल 1987 में हुआ जब कैप्टन मिलर ने श्रीलंकाई सेना के शिविर में विस्फोटकों से लदे एक ट्रक को उड़ा दिया था. इस हमले में 40 सैनिक मारे गए थे.

लिट्टे ने साल 1990 में 11 जून को इस्टर्न प्रोविएंस में धमाका किया था जिसमें उनका निशान श्रीलंका के पुलिस कर्मी थी और इनका मिशन पूरा भी हुआ था. इस हमले में 600 से अधिक लोगों की जान गई थी.

इसके बाद फिर साल 1996 नॉर्थ श्रीलंका के लिए काल बनकर आया था, मुल्लातिवु में श्रीलंका की मिलट्री और लिट्टे की बीच हुए नरसंहार में लिट्टे ने बम धमाके भी किए. यह नरसंहार 18 जुलाई 1996 से 25 जुलाई 1996 तक चला था जिसमें हजारों लोगों की जान गई थी. हालांकि देश में शांति बनाए रखने के लिए सरकार ने यहां पर सिर्फ 207 लोगों की ही मौत बताई थी.

वहीं फिर साल 15 अक्टूबर 1997 में कोलंबो के वर्ड ट्रेंड सेंटर में धमाका हुआ जिसमें 17 लोगों की मौत हुई थी. 1998 में श्रीलंका के कैंडी में स्थित टूथ रेलिक के मंदिर पर हमला हुआ. यह हमला भी लिट्टे द्वारा किया गया थो जिसमें 17 लोगों की जान गई थी और 25 लोगों से अधिक घायल हुए थे. यह मंदिर श्रीलंका में बौद्धों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है इसमें बुद्ध के दांत का अवशेष है और यह यूनेस्को द्वारा नामित विश्व धरोहर स्थल भी है.

श्रीलंका की जमीन पर साल 1998, 1999, 1996, 2001 में धमाके हुए फिर पांच साल 2006 में हुए बम धमाके में 100 लोगों से अधिक लोगों की जान गई. इसके बाद 2008 और 2009 में बम धमाके हुए, साल 2009 में दो बार धमाके हुए थे जो फरवरी और मार्च में थे. हालांकि इन धमाकों के बाद आज 21 अप्रैल 2019 को 10 साला बाद श्रीलंका की धरती पर धमाके हुए हैं.

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