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Earth Mystery: धरती के अंदर क्या छिपा है, 6 रहस्यमयी चीजों का चला पता; कैसे बना चांद? इसका भी हुआ खुलासा

Earth Mystery: वैज्ञानिकों ने पृथ्वी के अंदर गहराई में छिपी छह ऐसी रहस्यमयी संरचनाओं का पता लगाया है जिन्हें पहले कभी नहीं देखा गया था.

By: JP Yadav | Published: September 2, 2026 11:35:06 AM IST



Earth Mystery: वैज्ञानिकों ने पृथ्वी की गहराई में छिपी छह ऐसी रहस्यमयी संरचनाओं का पता लगाया है जिन्हें पहले कभी नहीं देखा गया था.  यह अलग बात है कि ये सारी चीजें यानी ग्रह की गहरी परतें पूरी तरह से पहुंच से बाहर हैं, लेकिन वैज्ञानिक शक्तिशाली भूकंपों से निकलने वाली भूकंपीय तरंगों (seismic waves) का इस्तेमाल करके इन छिपी हुई गहराइयों की जांच कर सकते हैं. अब चीनी वैज्ञानिकों ने हमारे पैरों के नीचे 1,800 मील (2,900 किमी) की गहराई पर गाढ़े मेंटल और तरल बाहरी कोर के बीच की सीमा पर मौजूद संरचनाओं का पता लगाया है.  ये गहराई में मौजूद स्कैटरर्स (deep-seated scatterers) लगभग अदृश्य होते हैं. यहां यह रोचक है कि वहां से गुजरने वाली भूकंपीय तरंगों के रास्ते पर हल्का सा असर डालते हैं.

मेंटल की सीमा पर बहुत ज़्यादा दबाव और अत्यधिक तापमान के कारण ये टुकड़े बदल जाते हैं.  इसके बाद आंशिक रूप से पिघल जाते हैं या उनमें मिनरल ट्रांसफॉर्मेशन (खनिजों में बदलाव) होता है. शोधकर्ताओं का यह भी कहना है कि इसके चलते मटीरियल के 6 ‘थर्मोकेमिकल पाइल्स’ (thermochemical piles) बन गए हैं, जो आसपास के मेंटल से बिल्कुल अलग हैं. 

‘JGR सॉलिड अर्थ’ जर्नल में छपे अपने पेपर में वैज्ञानिकों का कहना है कि ये संरचनाएं तब बनी होंगी जब बाहरी परतों का मटीरियल पृथ्वी की गहराई में खिंचकर चला गया होगा. इनमें कॉन्टिनेंटल क्रस्ट (महाद्वीपीय परत) के टुकड़े या ‘थिया’ (Theia) के अवशेष भी हो सकते हैं. थिया मंगल के आकार का एक प्रोटोप्लैनेट था, जिसके बारे में माना जाता है कि 4.5 अरब साल पहले पृथ्वी से टकराने के बाद उसी से चंद्रमा बना था.

काफी स्थिर लगती है धरती

यह भी पता चला है कि सतह से देखने पर पृथ्वी काफी स्थिर लगती है, लेकिन ग्रह के अंदर गहराई में हलचल और बदलाव होते रहते हैं. खासकर परतों के बीच की सीमाओं पर एक बहुत ही खास सीमा मैंटल और बाहरी कोर के बीच है. यहां ठोस लेकिन गाढ़ी चट्टानें तरल निकल और लोहे से मिलती हैं. इस सीमा पर तापमान में बहुत बड़ा अंतर होता है. एक परत से दूसरी परत के बीच लगभग 1,000°C (1,800°F) का अंतर होता है. वहीं, बाहरी कोर से निकलने वाली भारी गर्मी मैंटल में संवहन धाराएं (convection currents) पैदा करती है, जिन्हें मैंटल प्लम कहा जाता है. यह सतह पर ज्वालामुखी गतिविधि कहां होगी? यह तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं.

भूकंपीय तरंग का किया अध्ययन

घनत्व में भारी अंतर के कारण भूकंपीय तरंगें (seismic waves) भी इस सीमा पर काफी धीमी हो जाती हैं, जिससे भूवैज्ञानिक यह ‘देख’ पाते हैं कि वहां क्या हो रहा है. ग्रह के इस अजीब हिस्से के बारे में और जानने के लिए शोधकर्ताओं ने PKP प्रीकर्सर नाम की एक खास तरह की भूकंपीय तरंग का अध्ययन किया. यह अपेक्षाकृत कमजोर तरंगें होती हैं जो भूकंप से पैदा होने वाली तेज भूकंपीय तरंगों से ठीक पहले पहुंचती हैं. 

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PKP प्रीकर्सर वैज्ञानिकों के लिए बहुत उपयोगी होते हैं क्योंकि मैंटल की सीमा पर छिपी संरचनाओं (जिन्हें हेटेरोजेनिटी या विषमताएं कहा जाता है) में मौजूद मामूली अंतर से ये तरंगें बिखर जाती हैं. ग्रह के इस अजीब हिस्से के बारे में और जानने के लिए रिसर्चर्स ने ‘PKP प्रीकर्सर’ नाम की एक खास तरह की भूकंपीय लहर (seismic wave) का अध्ययन किया. ये कमज़ोर लहरें भूकंप से पैदा होने वाली तेज़ लहरों से ठीक पहले पहुंचती हैं. 

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पृथ्वी की 4 मुख्य परतें

क्रस्ट (पपड़ी): क्रस्ट चट्टानी बाहरी परत है जहाँ जीवन मौजूद है। इसकी मोटाई 3 से 43 मील के बीच होती है.

मेंटल: मेंटल पृथ्वी की सबसे बड़ी परत है और यह गर्म चट्टानों से बनी है. इसकी मोटाई लगभग 1,802 मील है और यह हमारे ग्रह के कुल आयतन (volume) का 84 प्रतिशत हिस्सा है.

बाहरी कोर: बाहरी कोर लगभग 1,367 मील मोटा है और यह तरल निकल और लोहे की परत से बना है, जो 5,500°C (9,932°F) तक गर्म है.

आंतरिक कोर: आंतरिक कोर लोहे का एक गर्म और घना गोला है, जिसका आकार लगभग चंद्रमा जितना है और यहां तापमान 5,200°C (9,392°F) तक पहुंच जाता है.

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ये बिखरी हुई लहरें तरल बाहरी कोर से तो गुज़रती हैं, लेकिन ठोस आंतरिक कोर से नहीं गुज़र पातीं. ये टकराकर वापस लौटती हैं और मुख्य लहर से पहले भूकंप मापने वाले डिटेक्टरों तक पहुंचती हैं. समस्या यह है कि PKP प्रीकर्सर बहुत कमज़ोर होते हैं, इसलिए भूकंपीय डेटा में इन्हें खोजना बहुत मुश्किल होता है. हर साल इकट्ठा किए गए हज़ारों सिग्नलों में इन्हें मैन्युअल रूप से (हाथ से) खोजना पड़ता है. अपने रिसर्च पेपर में रिसर्चर्स बताते हैं कि इन प्रीकर्सर की मैन्युअल पहचान करना अक्षम (inefficient), व्यक्तिपरक (subjective) और विशाल वैश्विक भूकंपीय डेटा सेट के लिए अपर्याप्त है.

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