नई दिल्ली : New Delhi

Richest Country On corona : एक तरफ जहां विशेषज्ञ पिछले एक साल से बार-बार चेतावनी दे रहे हैं. कि अगर सभी देशों को कोरोना की वैक्सीन नहीं पहुंचाई गई तो लाशें विछ जाएंगी. कोरोना के नए स्वरूप आते रहेंगे. और अर्थव्यवस्था भी चौपट हो जाएगी. उनकी ये बात आखिरकार 25 नवंबर 2021 को पुनः सच साबित हो गई. 25 नवंबर के ही दिन दक्षिण अफ्रीका में कोरोना के एक नया वैरिएंट ओमिक्रॉन के मिलने की पुष्टि हुई. उसके बाद मात्र 36 दिनों के भीतर ही यह वैरिएंट दुनिया के तमाम देशों में पहुंचकर हाहाकार मचाना शुरू कर दिया है.
अब ऐसे में बड़ा सवाल ये खड़ा होता है, कि क्या ऐसी विषम परिस्थिति को टाला जा सकता है?

वैक्सीन पर अमीर देशों का कब्जा   

फरवरी 2021 में जोहांसबर्ग के ओआर टैम्बो एयरपोर्ट पर भारी बारिश के बीच कोरोना वैक्सीन डोज़ से लदा हुआ अमीरात एयरलाइंस का एक विमान उतरा. इसे को SII से महंगे दामों पर खरीद लिया गया. यानि वैक्सीन बनने के साथ ही अमीर देशों ने जल्द ही अपने सभी नागरिकों को वैक्सिनेट करने के लिये महंगे से महंगे दामों में खरीद कर जरूरत से कई गुना ज्यादा वैक्सीन इकट्ठा कर ली. नतीजा ये रहा कि अमीर देशों के पास 120 करोड़ डोज एक्स्ट्रा हो गए और गरीब देशों को एक-एक डोज के लिये तरसने को मजबूर होना पड़ा.

गरीब देशों की मजबूरी  

11 नवंबर और 21 दिसम्बर 2021 के बीच यूरोपीय यूनियन, यूके और यूएस को वैक्सीन की 51 करोड़ डोज मिली. जिनमें 45 प्रतिशत इजराइल, 30 प्रतिशत यूएई, 27 प्रतिशत ब्रिटेन, 12 प्रतिशत अमेरिका के पास और दस प्रतिशत फ्रांस के पास आईं. तो वहीं गरीब देशों की बात करें तो तंजानिया के पास 1.5 प्रतिशत, सूडान 2.7 प्रतिशत, कमैरून 2.9 प्रतिशत, माली 3 प्रतिशत और नाइजीरिया 3.1 प्रतिशत. इन आंकड़ों से साफ जाहिर है कि अमीर देशों के अनुपात में गरीब देशों को वैक्सीन नहीं मिल पाई है. Oxfam की एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2021 के अंत तक अमीर देशों के पास कोरोना वैक्सीन की 120 करोड़ डोज एक्स्ट्रा है

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