वॉशिंगटन. अमेरिकी कैदियों ने मंगलवार को जेल के ढांचे सुधारने, बेहतर रहन-सहन, परोल और वोटिंग के अधिकार वापस पाने के लिए देशभर में हड़ताल का एेलान किया. दुनिया में अमेरिका में सबसे ज्यादा करीब 22 लाख लोग सलाखों के पीछे हैं. यह आंकड़ा साल 2016 का है. आयोजकों के मुताबिक यह हड़ताल 21 अगस्त से शुरू होकर 9 सितंबर तक चलेगी. अप्रैल में साउथ कैरोलिना के एक कारागार में दंगों के बाद यह कदम उठाया गया है.

हड़ताल का नेतृत्व कर रहे कैदियों के समूह के वकीलों ने कहा, ”ये पुरुष और महिलाएं रहने लायक स्थितियों की मांग के अलावा पुनर्वास, सुधार और आधुनिक गुलामी से छुटकारा चाहते हैं.” उन्होंने कहा, जेल में तय संख्या से ज्यादा कैदी होने के कारण गुस्सा बढ़ रहा है और 7 कैदी अब तक जान गंवा चुके हैं. आयोजकों ने पूरे अमेरिका में कैदियों से शांतिपूर्वक भूख हड़ताल और काम रोकने की सलाह दी है.

खाना पकाने और साफ-सफाई जैसे कामों के लिए कैदियों को कम पगार मिलने जैसी चीजें आयोजकों की शिकायती सूची में सबसे ऊपर हैं. उन्होंने इसे ”गुलामी” बताया है. स्मार्ट जस्टिस के लिए एसीएलयू कैंपेन चलाने वाले उदी ओफेर ने हड़ताल करने वालों की सराहना की और उनकी 10 मांगों खासकर कैदियों के मतदान अधिकार को समर्थन भी दिया.

मताधिकार कानून हर राज्य में अलग होते हैं, लेकिन कई जगहों पर कैदियों को जेल में बंद होने और कभी-कभी रिहा होने के बाद भी वोटिंग के अधिकार नहीं दिए जाते. बता दें कि हड़ताल करने वालों की 10 मांगें हैं, जिसमें रहने की बेहतर सुविधा और काले और भूरे इंसानों में भेदभाव को खत्म करना, परोल के बिना सजा देना, कैद के दौरान मौत और पुनर्वास पर ज्यादा खर्च करना शामिल है.

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