इस्लामाबाद. पाकिस्तानी अधिकारियों ने देश की बैंकिंग प्रणाली में पिछले साल 8,707 संदिग्ध वित्तीय लेन-देन का पता लगाया था. इस साल इन आंकड़ों में पिछले साल की तुलना में लगभग 57 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. ये खबर पाकिस्तान के लिए बुरी खबर है क्योंकि इस समय देश आतंक पर अंकुश लगाने के लिए वित्तीय कार्रवाई कार्य बल, एफएटीएफ के बढ़ते दबाव का सामना कर रहा है. पाकिस्तान की केंद्रीय एजेंसी वित्तीय निगरानी इकाई, एफएमयू ने मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकी वित्तपोषण से संबंधित जानकारी की जांच की. इसके जरिए उन्होंने संदिग्ध लेनदेन रिपोर्ट (एसटीआर) जारी की थी.

2018 में पता चला था कि 8,707 संदिग्ध लेनदेन हुई हैं वहीं 2017 में ये 5,548 थी. लेकिन इस साल केवल जनवरी और फरवरी में ही 1,667 एसटीआर जारी की गई है. इस बारे में जानकारी पाकिस्तान समाचार एजेंसी डॉन ने दी है. हाल ही में एक बैठक के दौरान अधिकारियों ने पीएम इमरान खान को बताया कि आतंक का वित्तपोषण वैश्विक दृष्टि से एक गंभीर मुद्दा है और यह पाकिस्तान के हित में रहेगा कि वो अपनी ओर से इसे ठीक रखें.

पिछले महीने पेरिस में अपनी पूर्ण बैठक में, एफएटीएफ ने कहा कि पाकिस्तान ने आतंक के वित्तपोषण पर अंकुश लगाने में सीमित प्रगति की है. साथ ही कहा गया था कि पाकिस्तान ने जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा, अल-कायदा, इस्लामिक स्टेट और जमात-उद-दावा द्वारा उत्पन्न आतंकी वित्तपोषण जोखिमों की उचित समझ नहीं दिखाई है. उन्होंने चेतावनी दी थी कि पाकिस्तान को बहुपक्षीय निगरानी समूह की ग्रे सूची में रखा गया है और उसे सितंबर तक एक कार्य योजना का पालन करना होगा. हालांकि इस बार जारी हुई रिपोर्ट से पता चला है कि अभी भी टेरर फंडिंग पर अंकुश नहीं लगाया गया है.

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