इस्‍लामाबादः चार्टर्ड अकाउंटेंसी फर्म द्वारा पेश की गई एक रिपोर्ट को देखने के बाद पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान इस बात की जानकारी दी है कि संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में पाकिस्तान के नागरिकों की 150 बिलियन डॉलर से भी ज्यादा की संपत्ति है. रिपोर्ट पर संज्ञान लेते हुए चीफ जस्टिस मियां साकिब निसार ने कोर्ट की सुनवाई के बीच में सवाल करते हुए पूछा कि एमनेस्टी स्कीम के बावजूद भी इतनी बड़ी रकम अभी भी विदेशों में है. जिसपर जवाब देते हुए स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के गर्वनर तारिक बाजवा ने अवैध तरीके से जमा धन की वसूली के लिए उठाए गए कदमों को विस्तार से बताया.

चीफ जस्टिस मियां साकिब निसार के सवाल का जवाब देते हुए गर्वनर बाजवा ने कहा, इस मामले में 152 लोगों को नोटिस जारी किया गया है जिनकी संपत्ति यूएई में है. उन्होंने बताया, अगर ये लोग हलफनामा लिखते हैं कि पाकिस्तान के बाहर उनकी संपत्तियां हैं तो हम उनसे इस मामले में पूछताछ करेंगे और उनपर मुनासिफ टैक्स लगाएंगे.

बाजवा ने कहा, अगर यह लोग इससे इनकार करते हैं तब इस मामले में हम यूएई सरकार की मदद ले सकते हैं. जिसमें इन 152 लोगों पर बेनामी संपत्ति कानून के तहत कार्रवाई करने को कहा जाएगा. बाजवा ने कहा, नेशनल अकाउंटैबिलिटी ब्यूरो और फेडरल इंवेस्टीगेशन एजेंसी सहित अन्य एजेंसियों से भी सहयोग और सरर्थन देने के लिए कहा गया है.

बाजवा के जवाब के बाद जस्टिस उमर आटा बांदियाल ने सवाल पूछा कि पाकिस्तान से बाहर फंड ट्रांसफर करना प्रतिबंधित है या नहीं. बाजवा ने जस्टिस उमर आटा के सवाल का जवाब देते हुए कहा, 10 हजार डॉलर तक की रकम को पाकिस्तान से बाहर ले जाने की इजाजत है. बाजवा के जवाब के बाद पाकिस्तान के अटार्नी जनरल मंसूर अली खान ने कोर्ट को बताया कि प्रधानमंत्री इमरान खान विदेशों में जमा काला धन लाने के लिए काफी गंभीर हैं.

उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि पीएम इमरान खान ने अपनी अध्यक्षता में एक टास्क फोर्स का गठन किया है जो विदेशों में जमा धन को वापस लाने के लिए कड़े कदम उठाने वाली है. मंसूर ने कहा कि पाकिस्तान सरकार चाहती है कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट उनका मार्गदर्शन करे.

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