नई दिल्ली. पाकिस्तान ( Pakistan ) के प्रधानमंत्री इमरान खान ने कुछ दिन पहले कहा था कि उनके पास देश चलाने के पैसे नहीं है और देश का कर्ज का बोझ दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है. इस बीच अब ऐसी खबरें सामने आ रही हैं कि देश से बाहर स्थित पाकिस्तान के दूतावास को चलाने के लिए पैसे नहीं है और कर्मचारी नौकरी छोड़ रहे हैं. अमेरिका में स्थित पाकितान दूतावास में ऐसे हालत है कि यहां स्टाफ को सैलेरी देने को भी पैसे ही है, दूतावास के रोजमर्रा के काम भी बंद पड़े हुए है.

दूतावास हुआ कंगाल, स्टाफ ने छोड़ी नौकरी

ख़बरों के मुताबिक पाकिस्तान दूतावास में अनुबंध में काम करने वाले आधे दर्जन से ज़्यादा लोगों को अगस्त माह की सैलेरी नही मिली हैं, जिसक बाद एक कर्मचारी ने नौकरी छोड़ दी और बचे हुए कर्मचारी भी काम पर नहीं जा रहे हैं. जिस व्यक्ति ने दूतावास छोड़ा है,वह 10 साल से दूतावास में नौकरी करता था. उन्होंने बताया कि इमरान की सरकार में ही ऐसे हालात हुए है, इससे पहले कभी इतने बुरे हालत पाकिस्तानी दूतावास के नहीं थे. पाकिस्तानी दूतावास में काम करने वाले लोगों ने बताया कि PCW फण्ड पहले ही खाली हो गया था, जिसके बाद पाकिस्तान सरकार ने कर्मचारी को सैलेरी देने के लिए कर्ज लिया था.

सर्बिया में पाकिस्तानी दूतावास ने भी बदहाली पर साधा था निशाना

पिछले हफ्ते सर्बिया में स्थित पाकिस्तानी दूतावास ने पाकिस्तान की बढ़ती हुए कंगाली पर निशाना साधा था, दूतावास के अधिकारी हैंडल से लिखा गया था कि -‘महंगाई सारे रिकॉर्ड तोड़ रही है. इमरान ख़ान, आप ये कब तक उम्मीद करते हैं कि हम सरकारी अधिकारी तीन महीने से बिना वेतन के चुपचाप आपके लिए काम करते रहें? हमारे बच्चे स्कूल छोड़ने पर मजबूर हैं क्योंकि हमारे पास पैसे नहीं हैं. क्या यही नया पाकिस्तान है?’ हलाकि इस ट्वीट पर पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने सफाई देते हुए कहा था कि सर्बिया दूतावास का ट्विटर हैंडल हैक हो गया था.

Imran ने UK का दिया उदाहरण

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने हाल ही में उदाहरण देते हुए बताया था कि पाकिस्तान से 50 गुना ज्यादा आय वाले ब्रिटेन के विदेश मंत्री 5 घंटे से कम की विदेश यात्रा के लिए इकॉनमी क्लास की सीट बुक करते हैं. जबकि पाकिस्तान के पूर्व मंत्रियों ने पाकिस्तान का पैसा खूब खर्च किया है. पाकिस्तान की स्थिति जो आज है, उसमें पिछली सरकार का दोष है. उन्होंने बताया की पाकिस्तान में मौजूद लोग टैक्स नहीं देते है और यह परंपरा पुराने काल से चली आ रही है. लोगो के टैक्स ना भरने की वजह से राजकीय कोष में कमी आती है और हमे कर्ज लेना पड़ता है.

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