नई दिल्ली. स्विटजरलैंड के तीन वैज्ञानिक माइकल मेयर और डिडीएर क्वेलोज के साथ कनाडाई-अमेरिकी जेम्स पीबल्स को संयुक्त रूप से फिजिक्स का नोबल प्राइज 2019 मिला है. जेम्स पीबल्स को कॉस्मोलॉजी में सैद्धांतिक खोज के लिए नोबल पुरस्कार दिया जा रहा है जबकि माइकल मेयर औऱ डिडीएर क्वेलोजद को सूर्य समान तारे के एक्जोप्लेलेट ऑर्बिटिंग संबंधित खोज के लिए नोबल पुरस्कार के लिए चुना गया है. रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने मंगलवार को इस साल के भौतिकी में नोबल पुरस्कार की घोषणा की. एक दिन पहले ही संस्था ने मेडिसिन में नोबल प्राइज की घोषणा की थी. ऑक्सीजन को समझने की क्षमता और उसके अनुकूल व्यवहार को समझने के लिए की गई मोलिक्यूलर मशीनरी की खोज के लिए तीन वैज्ञानिकों विलियम जी काइलीन जेआर, पीटर जे रैटक्लिफी और ग्रेग एल. सेमेंजा को इस बार मेडिसिन का नोबेल पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है. बुधवार 9 अक्टूबर को केमेस्ट्री के नोबल पुरस्कार की घोषणा की जाएगी.

जेम्स पीबल्स ने की फिजिकल कॉस्मोलॉजी की खोज-
इस साल के नोबल पुरस्कार विजेता जेम्स पीबल्स अमेरिका की प्रिंसटन यूनिवर्सिटी में अल्बर्ट आइंस्टीन प्रोफेसर हैं. पिछले पचास सालों में उन्होंने पिछले 50 सालों तक कॉस्मोलॉजी साइंस में हुए परिवर्तन पर काम किया और दुनिया के सामने रखा. जेम्स पीबल्स का जन्म कनाडा के विनीपेग में साल 1935 में हुआ था. इसके बाद वे अमेरिका आ गए और अपने साइंटिफिक रिसर्च वहीं किए.

मिशेल मेयर और डिडिएर क्वेलोज ने बताया कैसे हो अज्ञात ग्रह की खोज-
जेम्स पीबल्स के साथ संयुक्त रूप से फिजिक्स का नोबल प्राइज जीतने वाले मिशेल मेयर और डिडीएर क्वेलोज की कहानी अलग है. उन्होंने पता लगाया कि कैसे ब्रह्मांड में मौजूद तारे कैसे ग्रहों की तरफ खींचे चले आते हैं. इसे डोपलर इफेक्ट नाम दिया गया है. इसमें बताया गया कि पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण तारों को अपनी ओर खींचता है. इस कारण किसी तारे का प्रकाश इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पैक्ट्रम के ब्लू वेवलेंथ की ओर शिफ्ट हो जाता है.

प्रकाश की किरणें संकुचित हो जाती हैं और उनका रंग नीला हो जाता है. जैसे-जैसे तारे ग्रह की ओर जाते हैं, वैसे-वैसे उसे पीछे धकेलता जाता है. इससे तारे बाहर की ओर खींचे जाते हैं और इलेक्ट्रॉमैग्नेटिक स्पैक्ट्रम के लाल सिरे की तरफ आते जाते हैं. इसी सिद्धांत से तारे के आस-पास मौजूद किसी अज्ञात ग्रह की खोज की जा सकती है. साथ ही दुनिया में एक साल कितना लंबा होगा इसका भी पता लगाया जा सकता है.

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