नई दिल्ली. 2019 का साहित्य का नोबेल प्राइज ऑस्ट्रिया के नॉवलिस्ट और स्क्रीन प्ले राइटर पीटर हंडके को दिया गया है. अब इस अवॉर्ड पर विवाद भी शुरू हो गया है. 2014 में खुद पीटर हंडके ने नोबेल पुरस्कारों को फर्जी बताया था और अब खुद को पुरस्कार मिलने के बाद उन्होंने स्वीडिश अकादमी के इस फैसले को साहसिक बताया है. बता दें कि 1990 में युगोस्लाविया के पूर्व राष्ट्रपति स्लोबोदान मिलोशेविच का समर्थन करने के कारण पीटर हंडके का विरोध हो रहा है.

1990 में यूगोस्लाविया के टूटने के बाद उससे कई देश बने. इसमें क्रोएशिया, सर्बिया, मोंटेनेग्रो, मैसेडोनिया, बोस्निया-हर्जगोविना शामिल हैं. सबसे पहले साल 1991 में क्रोएशिया ने खुद को स्वतंत्र घोषित किया था. क्रोएशिया की आजादी की लड़ाई 1995 तक चली. इसके बाद बोस्निया में भयानक कत्लेआम हुआ, जिस पर 1995 में डेटन समझौते के साथ लगाम लगी.

1999 में कोसोवो के बागियों के समर्थन के नाम पर नाटो देशों ने सर्बिया में बमबारी की इसके खिलाफ पीटर हंडके ने खुलकर आवाज उठाई थी. 1996 में लिखा गया उनका यात्रा वृतांत ‘ए जर्नी टू द रिवर्स: जस्टिस फॉर सर्बिया’ प्रकाशित हुआ. यह किताब काफी चर्चित और विवादित हुई. 1999 में नाटो की बमबारी के विरोध में पीटर हंटके ने जर्मनी का प्रतिष्ठित बुशेनर पुरस्कार लौटा दिया था.

तेज हुआ पीटर हंडके को साहित्य का नोबेल मिलने का विरोध

अल्बेनिया के प्रधानमंत्री इदी रामा ने हंडके को नोबेल दिए जाने पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. रामा ने कहा, ‘नोबेल अकादमी ने साहित्य नोबेल के लिए बेहद अमर्यादित और अनैतिक चुनाव किया है. शर्मनाक चीजों को गुण के तौर पर स्वीकारा जा रहा है. नहीं, हम नस्लवाद और नरसंहार पर चुप नहीं रह सकते.’

इसके अलावा कोसोवो के राष्ट्रपति हाशिम थकी ने ट्वीट किया, ‘नोबेल प्राइज समिति के निर्णय से अनगिनत पीड़ितों को बेहद तकलीफ हुई है.’

इसके अलावा अमेरिका में साहित्य के क्षेत्र में काम करने वाली संस्था पेन अमेरिका ने भी नोबेल अकादमी के इस निर्णय की आलोचना की है

क्या है विरोध की मुख्य वजह
बता दें कि सर्बिंका में हुए नरसंहार, जिसमें 8 हजार मुस्लिम मर्दों की हत्या हुई थी, उसके एक सर्वाइवर ने कहा, ‘मिलोशेविच के फैन और नरसंहार को झुठलाने वाले को साहित्य का नोबेल प्राइज मिल रहा है. ये किस वक्त में जिंदा हैं हम लोग.’ पीटर हंडके पर इन नरसंहारों को झुठलाने और युगोस्लाविया के तानाशाह माने जाने वाले पूर्व राष्ट्रपति स्लोबोदान मिलोशेविच का समर्थन करने का आरोप है.

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