नई दिल्ली. पड़ोसी मुल्क नेपाल में बड़ा राजनीतिक उलटफेर हुआ है। नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली सोमवार को संसद के निचले सदन में अपना बहुमत साबित करने में असफल रहे। जिसके बाद उनके हाथों से प्रधानमंत्री का पद चला गया है।

प्रधानमंत्री ओली की ओर से पेश विश्वास प्रस्ताव के समर्थन में केवल 93 मत मिले जबकि 124 सदस्यों ने इसके खिलाफ मत दिया। ओली को कुल 136 मतों की जरूरत थी जो कि नहीं हो सका। 15 सांसद तटस्थ रहे जबकि 35 सांसद वोटिंग से गायब रहे।

अल्पमत में आ गई थी सरकार

इससे पहले नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी ने ओली सरकार से अपना समर्थन वापस लेने का ऐलान किया था, जिसके बाद केपी ओली की सरकार अल्पमत में आ गई।

उठ रहे थे विरोध के सुर

पीएम केपी ओली को सत्ताधारी नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी से निकाल दिया गया। ओली के खिलाफ लगातार विरोध के सुर उठ रहे थे। इसका कारण था कि नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी में दो अलग-अलग गुट हो गए थे।

नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी केंद्र) के बड़े नेता पुष्प कमल दहल प्रचंड ने अपना अलग धड़ा बना लिया है। जिसके बाद से लगातार केपी ओली को हटाने की कवायद की जा रही थी और विरोध हो रहा था।

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