नई दिल्लीः अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने दुनिया को एक आने वाले बड़े खतरे के बारे में आगाह किया है. नासा की रिपोर्ट के मुताबिक मिस्त्र के गीजा पिरामिड के आकार से बड़ा एक चट्टान का टुकड़ा (उल्कापिंड) धरती के बेहद करीब से गुजरने वाला है. हालांकि इसकी पृथ्वी से दूरी लगभग 50 लाख किलोमीटर होगी लेकिन उसके बाद भी नासा ने इसको एक बड़े खतरे के रूप में दर्शाया है. नासा के मुताबिक धरती के पास से गुजरने वाले इस उल्का पिंड का साइज गीजा के पिरामिड से भी बड़ा होगा. जिसको देखते हुए कहा जा रहा है कि अगर ये उल्कापिंड धरती से टकरा जाता है तो उससे धरती का कोई भी बड़े से बड़ा शहर सैंकेंडो में तबाह हो सकता है.

रिपोर्ट्स के मुताबिक विशाल उल्कापिंड 20 हजार मील प्रतिघंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है. जो इस हफ्ते पृथ्वी के पास से गुजरेगा. इस उल्कापिंड को एनएफ 23 नाम दिया गया है. जो 29 अगस्त को पृथ्वी के पास से गुजरेगा. हालांकि 2016 एनएफ 23 का की पृथ्वी से निकटता को देखें तो यह लगभग 0.033 खगोलीय इकाइयों या हमारे ग्रह के करीब 3 मिलियन मील की दूरी से गुजरेगा. यदि आपके पास अच्छी दूरबीन है, तो आप पृथ्वी के पास से गुजरने वाले गीज़ा पिरामिड-आकार वाले उल्कापिंड को देख पाएंगे.

नासा के मुताबिक अगर ये उल्कापिंड पृथ्वी से टकराता है तो उससे बड़ी तबाही की आशंका है लेकिन इसे रोकने के लिए किसी के पास कोई हल नहीं है. नासा के मुताबिक उल्कापिंड न्यूयॉर्क सिटी की तरफ बढ़ रहा है और उसकी चाल और दिशा पर लगातार नजर रखी जा रही है. अब तक मिली जानकारी के मुताबिक ये उल्कापिंड वैसे तो अमेरिका की आबादी को किसी भी तरह के खतरे में नही डालेगा लेकिन अगर ये पृथ्वी से टकराता है तो बस फिर प्रार्थना ही किजिए.

नासा धरती के आस-पास घूम रहे एक किलोमीटर या उससे बड़े आकार वाले 95 प्रतिशत से ज्यादा उल्कापिंडो पर नजर रखती है. लेकिन अगर गीजा के पिरामिड के आकार का उल्कापिंड पृथ्वी से टकराएगा तो कल्पना कीजिए क्या होगा. विशेषज्ञों के मुताबिक अगर इतने बड़े आकार का उल्कापिंड धरती से टकराता है तो ये धरती पर सभ्यता को खत्म कर सकता है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 50 मीटर व्यास वाले उल्का पिंडों की संख्या काफी कम है. एक अनुमान के मुताबिक 10,000 उल्का पिंडों में से इतने बड़े आकार के सिर्फ 10 फीसदी होते हैं. औसतन बड़े आकार का उल्का पिंड हर 1,000 साल में पृथ्वी से टकराता है.

पृथ्वी की तरफ बढ़ते हुए उल्कापिंड के खतरे को देखते हुए नासा ने अपनी निगरानी तेज कर दी है और इसके अलावा अन्य देशों की एजेंसियों के साथ मिलकर इस विशालकाय उल्कापिंड का मार्ग बदलने पर भी विचार किया जा रहा है ताकि इस उल्का पिंड को धरती से टकराने से रोका जा सके.

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