नई दिल्ली. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का चंद्रयान 2 अपनी मंजिल के एक कदम और करीब पहुंच गया है. आज यानी 2 सिंतबर को दोपहर 1.15 बजे चंद्रयान 2 यान के ऑर्बिटर विक्रम लैंडर को अलग कर दिया है. अगले 20 घंटे तक विक्रम लैंडर अपने ऑर्बिटर के पीछे पीछे 2 किलोमीटर प्रति सेकेंड की गति से चांद का चक्कर लगाता रहेगा. अभी विक्र लैंडर 119 किलोमीटर की एपोडी और 127 किलोमीटर की पेरीजी में चक्कर लगा रहा है. बता दें कि चंद्रयान 2 में कुल तीन हिस्से हैं. पहला है ऑर्बिटर, दूसरा है विक्रम लैंडर और तीसरा है प्रज्ञान रोवर. विक्रम लैंडर के अंदर ही प्रज्ञान रोवर है जो सॉफ्ट लैंडिंग के बाद बाहर निकलेगा.

चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर चांद से 100 किमी ऊपर चक्कर लगाते हुए लैंडर और रोवर से प्राप्त जानकारी को इसरो सेंटर पर भेजेगा. इसमें 8 पेलोड हैं. साथ ही इसरो से भेजे गए कमांड को लैंडर और रोवर तक पहुंचाएगा. इसे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने बनाकर 2015 में ही इसरो को सौंप दिया था. लैंडर का नाम इसरो के संस्थापक और भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक विक्रम साराभाई के नाम पर रखा गया है. इसमें 4 पेलोड हैं. यह 15 दिनों तक वैज्ञानिक प्रयोग करेगा. इसकी शुरुआती डिजाइन इसरो के स्पेस एप्लीकेशन सेंटर अहमदाबाद ने बनाया था. बाद में इसे बेंगलुरु के यूआरएससी ने विकसित किया.

चंद्रयान 2 के लिए अब हर दिन बेहद महत्वपूर्ण
3 सितंबर को पहला डीऑर्बिट यानी विक्रम लैंडर विपरीत दिशा में कक्षा बदलेगा. 3 सितंबर को सुबह 8.45 से 9.45 बजे के बीच विक्रम लैंडर चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर का पीछा छोड़ नई कक्षा में जाएगा. तब यह 109 किमी की एपोजी और 120 किमी की पेरीजी में चांद का चक्कर लगाएगा. इसे वैज्ञानिक भाषा में डिऑर्बिट कहते हैं यानी जिस दिशा में वह जा रहा था, उसके विपरीत दिशा में आगे बढ़ना. ऑर्बिटर से अलग होने के बाद विक्रम लैंडर 2 किमी प्रति सेकंड की गति से ही चांद के चारों तरफ ऑर्बिटर के विपरीत दिशा में चक्कर लगाएगा. ऐसा इसलिए किया रहा हैं क्योंकि ऑर्बिटर चांद के चारों तरफ ऊपर 100 किमी की दूरी पर चक्कर लगाएगा. लेकिन, चांद के दक्षिणी ध्रुव पर जाने के लिए विक्रम लैंडर को अपनी दिशा बदलनी होगी. इसलिए उसे विपरीत दिशा में चांद का चक्कर लगाना होगा.

4 सितंबर को चांद के चारों तरफ विक्रम दूसरी बार बदलेगा अपनी कक्षा. इसरो वैज्ञानिक विक्रम लैंडर को 4 सितंबर को शाम 3 से 4 बजे के बीच चांद के सबसे नजदीकी कक्षा में पहुंचाएंगे. इस कक्षा की एपोजी 36 किमी और पेरीजी 110 किमी होगी.

5 और 6 सितंबर को लगातार होगी विक्रम लैंडर के सेहत की जांच

4 सितंबर को दूसरी बार चांद की कक्षा बदलने यानी चांद के सबसे नजदीकी कक्षा में पहुंचने के बाद 6 सितंबर तक विक्रम लैंडर के सभी सेंसर्स और पेलोड्स के सेहत की जांच होगी. प्रज्ञान रोवर के सेहत की भी जांच की जाएगी.

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इसरो ने ट्वीट कर दी जानकारी

प्रज्ञान रोवरः इस रोबोट पर मिशन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी, 15 मिनट में मिलेगा डाटा
27 किलो के इस रोबोट पर ही पूरे मिशन की जिम्मदारी है. इसमें 2 पेलोड हैं. चांद की सतह पर यह करीब 400 मीटर की दूरी तय करेगा. इस दौरान यह विभिन्न वैज्ञानिक प्रयोग करेगा. फिर चांद से प्राप्त जानकारी को विक्रम लैंडर पर भेजेगा. लैंडर वहां से ऑर्बिटर को डाटा भेजेगा. फिर ऑर्बिटर उसे इसरो सेंटर पर भेजेगा. इस पूरी प्रक्रिया में करीब 15 मिनट लगेंगे. यानी प्रज्ञान से भेजी गई जानकारी धरती तक आने में 15 मिनट लगेंगे.

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