Iran America Nuclear Agreement: ईरान और अमेरिका के बीच अंतरिम न्यूक्लियर एग्रीमेंट फाइनल हो गया है. अब इसके अनाउंसमेंट की तैयारी चल रही है. अमेरिका की तरफ से प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप और ईरान की तरफ से सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के इस पर साइन करने की उम्मीद है. अंतरिम एग्रीमेंट में होर्मुज स्ट्रेट को बिना टोल के पूरी तरह खोलने की बात कही गई है. इससे यह सवाल उठता है.
एग्रीमेंट के बाद होर्मुज स्ट्रेट आखिर कब खुलेगा?
होर्मुज फारस की खाड़ी का गेटवे है, जिसे तीन आइलैंड के ज़रिए ईरान कंट्रोल करता है. यह पतला 34 किलोमीटर का रास्ता दुनिया की लगभग 20 परसेंट गैस और तेल सप्लाई करता है. युद्ध से पहले यह रास्ता पूरी तरह खुला था, लेकिन अमेरिका के हमले के बाद ईरान ने इसे ब्लॉक कर दिया.
होर्मुज स्ट्रेट को खुलने में कितना समय लगेगा?
1. ईरान ने होर्मुज के पानी के नीचे 12 खतरनाक लैंडमाइन बिछाई हैं. इस रास्ते को खोलने के लिए पहले इन्हें हटाना होगा. ईरान का कहना है कि इसमें कम से कम 30 दिन लग सकते हैं. ईरान यह काम खुद करना चाहता है. एग्रीमेंट के बाद, सुप्रीम लीडर के ऑर्डर पर प्रोसेस शुरू होगा.
2. हाई फ़्रीक्वेंसी इकोनॉमिक्स के चीफ़ इकोनॉमिस्ट कार्ल वेनबर्ग का कहना है कि कोई पक्की तारीख नहीं बताई जा सकती. एग्रीमेंट के बाद डिसमेंटलिंग प्रोसेस शुरू होने में एक हफ़्ते से ज़्यादा लग सकता है. ईरान भी US को भरोसेमंद नहीं मानता. एग्रीमेंट के बावजूद, उसे हमले का डर बना रहेगा.
3. इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के मुताबिक, अभी फ़ारस की खाड़ी में 2,000 कार्गो जहाज़ फंसे हुए हैं. इन जहाज़ों को होर्मुज़ स्ट्रेट से निकालना मुश्किल है. जहाज़ों को तब तक नहीं निकाला जाएगा जब तक उन्हें यकीन न हो जाए कि होर्मुज़ स्ट्रेट में अब कोई खतरा नहीं है.
4. अप्रैल 2026 में, पेंटागन के अधिकारी होर्मुज़ स्ट्रेट के बारे में US सांसदों के सामने पेश हुए. अमेरिकी अख़बार वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक, पेंटागन ने कहा कि छोटे टैंकर जल्दी निकल सकेंगे, लेकिन बड़े जहाज़ों को होर्मुज़ से निकलने में कम से कम छह महीने लग सकते हैं.
US और ईरान के बीच अंतरिम एग्रीमेंट क्या है?
CNN के मुताबिक, US और ईरान एक अंतरिम समझौते पर सैद्धांतिक रूप से सहमत हो गए हैं. इसका फ़ाइनल ड्राफ़्ट तैयार किया जा रहा है और इसकी घोषणा की जाएगी. इस डील के तहत, ईरान होर्मुज़ स्ट्रेट को खोलेगा और न्यूक्लियर हथियार नहीं बनाएगा.
इसके बदले में, US ईरान पर हमला नहीं करेगा और ज़ब्त किया गया पैसा वापस कर देगा. डील में लेबनान पर हमला न करने का भी ज़िक्र है. इसका मतलब है कि लेबनान में युद्ध अब पूरी तरह खत्म हो जाएगा.