नई दिल्लीः अमेरिका और भारत के बीच लंबे समय से विचाराधीन रक्षा तकनीक समझौतों पर हस्ताक्षर हुआ. इस समझौते के तहत नई दिल्ली और वाशिंगटन के बीच रक्षा तकनीक के मामलों में आपसी सहयोग में बढ़ावा मिलेगा. इस दौरान दोनों देशों ने महत्वपूर्ण कॉमकासा (COMCASA) समझौते पर भी हस्ताक्षर किए. Communications, Compatibility, Security Agreement (COMCASA) समझौते पर बोलते हुए भारत की रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि इस समझौते के बाद अब भारत को रक्षा विभाग में उन्नत तकनीक मिल सकेगी, जिससे उन्नत किस्म के मारक हथियार तैयार किए जा सकेंगे. उन्होंने कहा कि भारत का हमेशा से यह मानना रहा है कि तकनीक का बेहतर इस्तेमाल करके आतंकवाद जैसी बड़ी चुनौतियों पर नियंत्रण किया जा सकता है.

वहीं इस मौके पर भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि इस समझौते के बाद भारत और अमेरिका के बीच आपसी संबंधों को नई ऊंचाईयां मिली हैं. सुषमा ने कहा कि अमेरिका भी चाहता है कि भारत को न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप (एनएसजी) में प्रवेश मिले. सुषमा स्वराज ने कहा कि अमेरिका भी भारत की क्षेत्रीय कठिनाईयों को समझता है और इस बात से भी सहमत है कि आतंकवाद भारत की मु्ख्य चुनौती है. सुषमा ने लश्कर-ए-तैयबा को आतंकी संगठन घोषित करने की कार्यवाही का स्वागत किया.

इस मौके पर अमेरिका के सेक्रेट्री ऑफ स्टेट माइक कॉम्पियो ने कहा कि ट्रंप प्रशासन चाहता है कि दोनों देश साझा मुद्दों पर एक साथ कामकर आगे बढ़ें. माइक ने कहा अमेरिका और भारत आईटी, तकनीक और रक्षा क्षेत्र में एक साथ काम कर इतिहास बना सकते हैं. उन्होंने इसके बाद भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मिलने की बात कही.