हॉंग कॉंग. दुनिया के सबसे बिजी एयरपोर्ट में से एक हॉन्ग कॉन्ग एयरपोर्ट के सामने हजारों प्रदर्शनकारी जमा हैं. सोमवार को वहां जमे प्रदर्शनकारियों की वजह से कई फ्लाइट रद्द करनी पड़ी. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले भी छोड़े गए. दरअसल हॉन्ग कॉन्ग में बीते दो महीने से भी ज्यादा वक्त से एक आंदोलन चल रहा है. यह आंदोलन उस बिल के विरोध में हो रहा है जिसके अंतर्गत हॉन्ग कॉन्ग के लोगों को भी चीन को प्रत्यारोपित कर दिया जाएगा. हॉन्ग कॉन्ग में चीन से अलग कानून चलते हैं. यह दोनों देश एक देश दो विधान के सिस्टम पर चलते हैं जैसा कि ब्रिटेन और चीन की संधी में तय हुआ था. लेकिन अब चीन, हॉन्ग कॉन्ग में अपना पूरा हस्तक्षेप चाहता है. स्थानीय निवासी इसी के विरोध में आंदोलन कर रहे हैं.

हॉन्ग कॉन्ग की स्थिति पर दुनिया भर के नेता चिंता जाहिर कर रहे हैं. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उम्मीद करता हूं हॉन्ग कॉन्ग में सब ठीक रहेगा और चीन भी इससे सहमत होगा. चीन का इतिहास दमनकारी तरीके से आंदोलनों को कुचलने का रहा है ऐसे में विश्व नेताओं को यह डर भी है कि हॉंग कॉंग को इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है.

क्या है गतिरोध की वजह
बता दें कि हॉन्ग कॉन्ग पहले ब्रिटेन का उपनिवेश था. 1997 में ब्रिटेन ने चीन को हॉन्ग कॉन्ग हैंडओवर किया. इस दौरान एक करार हुआ जिसमें चीन और हॉन्ग कॉन्ग दोनों पार्टी थे. इस करार के मुताबिक एक देश, दो सिस्टम पर सहमति बनी. हॉन्ग कॉन्ग का अपना कानून है वहां चीन के कानून लागू नहीं होते. इससे चीन के मुकाबले हॉन्ग कॉन्ग के नागरिकों को कहीं अधिक आजादी मिली हुई है. हॉन्ग कॉन्ग में अधिकारियों और प्रशासन ने इस बिल का समर्थन किया है लेकिन यह वहां की आम जनता को फूटी आंख नहीं सुहा रहा है. आंदोलन कर रहे लोगों की मुख्य मांगे हैं कि इस बिल को रद्द किया जाए, हॉन्ग कॉन्ग की राजनीति को चीन के दखल से मुक्त किया जाए.

बता दें कि गत जून महीने में हजारों की संख्या में लोग इस बिल के विरोध में सड़कों पर उतरे थे. धीरे धीरे इसमें और लोग जुड़ते गए और यह आंदोलन काफी फैल गया. हॉन्ग कॉन्ग के इतिहास का सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन भी इसी दौरान आयोजित हुआ जिसमें लगभग 20 लाख लोगों ने शिरकत की. हॉन्ग कॉन्ग के बाजार, दुकानें, सड़कों पर हर तरफ यह आंदोलन फैल चुका है. दफ्तर, स्कूल, कॉलेज सभी बंद हैं. राजनीतिक दलों में भी कई अब इस बिल के विरोध में उतर आए हैं.

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चीन क्या चाहता है
चीन भले ही खुद साम्राज्यवाद का शिकार रहा हो लेकिन उसके अंदर यह प्रवृति कूट-कूटकर भरी है. चीन ने हॉन्ग कॉन्ग की सरकार से जुलाई में कहा कि अगर वो चाहें तो चीन अपने पीपुल्स लिबरेशन आर्मी को हॉन्ग कॉन्ग में तैनात कर सकता है जिससे वहां की व्यवस्था बहाल हो सके. पिछले दिनों ही चीनी झंडा लिए कुछ लोगों ने हॉन्ग कॉन्ग के एक क्लब में कई लोगों के साथ बुरी तरह मारपीट की थी जिसमें 45 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था. चीन हॉन्ग कॉन्ग को पूरी तरह अपने अधीन करना चाहता है. देखना होगा कि स्थानीय लोगों के आंदोलन को कुचलने के लिए अगर चीन कोई दमनकारी कदम उठाता है तो अंतर्राष्ट्रीय बिरादरी क्या रुख अपनाती है.

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