नई दिल्ली. इंस्टीट्यूट ऑफ गिलगित-बाल्टिस्तान स्टडीज के डायरेक्टर, वाशिंगटन डीसी और एक्टिविस्ट सेगेन एच सेरिंग ने 12 सितंबर को कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान की खिंचाई की. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर को एक धार्मिक मुद्दा बनाकर बहुत बड़ी गलती की है. उन्होंने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान को भारतीय मुसलमानों के इस कथन से सीखना चाहिए कि जम्मू और कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और वे इस विचार का समर्थन करते हैं कि यह क्षेत्र भारत का अभिन्न अंग है. पाकिस्तान को भारतीय मुसलमानों की भावनाओं के साथ खेलना बंद कर देना चाहिए और यह मान लेना बंद कर देना चाहिए कि भारतीय मुसलमान पाकिस्तान के साथ खड़े रहेंगे.

जिनेवा में गिलगित-बाल्टिस्तान के कार्यकर्ता सेंज एच सेरिंग ने कहा कि, अचानक जब घाटी में कुछ होता है तो हर कोई दर्द महसूस करने लगता है और बात यह है कि भारत अपने स्वयं के संविधान के साथ काम कर रहा है. भारत अपने संविधान में संशोधन कर रहा है. अगर आपको लगता है कि भारत एक व्यवसायी है, तो आपकी मांग यह होनी चाहिए कि वह जम्मू-कश्मीर से अपने संवैधानिक प्रावधान को हटाए और यह नहीं कि वह आर्टिकल 370 को बनाए रखे. यह कहकर कि भारत में आर्टिकल 370 होना चाहिए, आप स्वीकार कर रहे हैं कि जम्मू और कश्मीर भारत का संवैधानिक हिस्सा है और यही हम दुनिया को बता रहे हैं.

उन्होंने कहा, गिलगित-बाल्टिस्तान के लोग कह रहे हैं कि पाकिस्तान एक पाखंडी है, दोहरे मापदंड रखता है, जम्मू-कश्मीर के बारे में कोई व्यापार नहीं करता है, एक आपराधिक देश है और एक अधिभोगी है. यदि आपके पास संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 47 में वास्तव में विश्वास है, तो पहला व्यवसाय आपके पास है, जिसे गिलगित-बाल्टिस्तान और पीओके से वापस लेना है. पाक को हटने के लिए 90 दिन का समय दिया गया, 70 वर्ष से इसलिए यह अब भी वहां बैठा है, हमारे संसाधनों को चुरा रहा है और स्थानीय लोगों को एक पैसा नहीं दे रहा है.

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