नई दिल्ली. इमरान खान की पाकिस्तान सरकार सिंध के शहर कराची के प्रशासनिक फैसलों का अधिकार अपने पास करना चाहती है. दरअसल पाकिस्तानी कानून मंत्री फारूख नसीम ने बयान दिया था, “कैबिनेट से मंजूरी मिलते ही सिंध के लिए विशेष प्रावधानों वाली धारा 149 को खत्म कर दिया जाएगा. अगर सिंध सरकार की तरफ से इसका विरोध होता है तो हम सुप्रीम कोर्ट में संविधान के आर्टिकल 184(1) के तहत कार्रवाई की मांग करेंगे. अगर इसके बाद भी सिंध की तरफ से विरोध होता है तो हम सुप्रीम कोर्ट में अदालत की अवमानना की याचिका डालेंगे.” मंत्री जी के इतना कहते ही पाकिस्तान में बवाल हो गया है. पीपीपी अध्यक्ष बिलावल भुट्टो सहित विपक्षी नेताओं ने सरकार की इस मंशा की निंदा की है.

मुख्य विपक्षी पार्टी पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (पीपीपी) के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा, ” आप नरेंद्र मोदी के खिलाफ लोगों को एकमत करना चाहते हैं कि उन्होंने कश्मीर पर गैरकानूनी तरीके से कब्जा किया है और ठीक उसी वक्त आप कराची पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं. यह बेहद अजीब है.” बता दें कि इसके बाद पाकिस्तानी सोशल मीडिया पर सिंध की आजादी की मांग तेज हो गई. ट्विटर पर कई यूजर्स #FreeSindhuDesh ट्रेंड करा रहे हैं. बता दें कि हाल ही में यूएनपोओ में गए पाकिस्तान को काफी किरकिरी का सामना करना पड़ा. सिंध और बलूचिस्तान में पाकिस्तान के अत्याचारों के पोस्टर हर तरफ दिखाई दे रहे थे. प्रदर्शनकारी पाकिस्तानी नेताओं के आगे बेहद आक्रामक तरीके से विरोध प्रदर्शन कर रहे थे.

युनाइटेड नेशन एंड पीपल्स ऑर्गेनाइजेशन (यूएनपीओ) के महासचिव राल्फ बुंचे ने जेनेवा में कहा, आज मैं पाकिस्तान में धार्मिक आजादी पर बोल रहा था खासकर सिंध में. मैंने यह बताया कि वहां एक बहुत लंबी लड़ाई काफी वक्त से जारी है जो पाकिस्तान में धार्मिक आजादी चाहती है. पिछले नवंबर में यूएस डिपार्टमेंट ऑफ स्टेट ने पाकिस्तान को एक ऐसे देश के तौर पर रेखांकित किया जहां धार्मिक आजादी की स्थिति के मामले में भयानक स्थिति है. पाकिस्तान धार्मिक आजादी के मामले को टाल नहीं सकता न ही धार्मिक कट्टरता और जोर जबर्दस्ती से उन पर प्रहार कर सकता है. यूएनपीओ उम्मीद करता है यूरोपियन यूनियन भी यूएस स्टेट की इस राय से सहमत होगा और पाकिस्तान, अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक आजादी के पैमानों और नियमों को बिल्कुल नहीं मान रहा है और इस पर कड़ी कार्रवाई करेगी और अभी पाकिस्तान के व्यापारिक हितों पर भी चोट करेगी.

वर्ल्ड सिंधी कांग्रेस के सचिव भी जेनेवा में मौजूद थे. उन्होंने कहा, ” वो (पाकिस्तान) सिंध के संसाधन और जमीन तो चाहते हैं लेकिन वहां के लोगों को नहीं चाहते. वो राजनीतिक कार्यकर्ताओं का अपहरण कर रहे हैं, अल्पसंख्यकों को देश छोड़ने पर मजबूर कर रहे हैं, सिंधी लोगों के ऐतिहासिक अधिकारों के खिलाफ फैसले ले रहे हैं. इससे समाजिक और नागरिक विवाद पैदा हो रहा है. हमने आज अंतर्राष्ट्रीय समुदाय मांग की है कि वो पाकिस्तान पर सिंध के लिए दबाव बनाए. यूएन मानवाधिकार काउंसिल को पाकिस्तान की सदस्यता रद्द कर देनी चाहिए जब तक कि वो अपहृत लोगों को छोड़ नहीं देते. जब तक वो धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा बंद नहीं कर देते.”

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