नई दिल्ली. साल 2014 में नवाज शरीफ सरकार के खिलाफ आजादी मार्च निकालकर सत्ता पर काबिज होने वाले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के खिलाफ जमात ए इस्लामी (एफ) प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने 27 अक्टूबर कराची से आजादी मार्च शुरू कर दिया है. हजारों की संख्या में सड़कों पर उतरे लोग इमरान खान के इस्तीफे की मांग करते हुए आजादी मार्च में शामिल हैं जिनकी तादाद 31 अक्टूबर तक राजधानी इस्लामाबाद में हजारों से लाखों तक पहुंचने का अनुमान है. बिलावल भुट्टो की पीपीपी भी मौलाना फजलुर रहमान के आजादी मार्च का समर्थन कर रही है.

रैली का नेतृत्व कर रहे जेयूआई (एफ) चीफ मौलाना फजलुर रहमान ने कराची में लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि पीएम इमरान खान अपना इस्तीफा क्योंकि वे धांधली के जरिए सत्ता तक पहुंचे हैं.

मौलाना ने कराची में कहा कि वे इस्लामाबाद पहुंचकर बताएंगे कि आगे क्या करना है. पाकिस्तानी मीडिया की मानें तो मौलाना फजलुर रहमान भीड़ के साथ इस्लामाबाद के बाहर पहुंचकर धरने पर बैठेंगे साथ ही प्रधानमंत्री इमरान खान के घर की ओर भी कूच कर सकते हैं.

इस्लामाबाद में सिर्फ संडे बाजार में प्रदर्शन की अनुमति

हालांकि, इमरान खान की पीटीआई सरकार में रक्षा मंत्री परवेज खटक ने रैली आयोजकों से शांति से प्रदर्शन करने के लिए कहा है. प्रशासन की ओर मौलाना फजलुर रहमान को इस्लामाबाद के एफ 9 इलाके के संडे बाजार में प्रदर्शन की अनुमति मिली है.

प्रशासन की ओर से निर्देष दिए गए हैं कि रैली राजधानी इस्लामाबाद के रेड जोन में प्रवेश नहीं करेगी. साथ ही सरकार ने भरोसा दिया कि मौलाना फजलुर रहमान का मार्च कहीं भी नहीं रोका जाएगा. साथ ही इस्लामा बाद पहुंचकर रैली में पहुंचे लोगों के खाने-पीने का इंतजाम किया जाएगा.

साल 2014 में इमरान खान ने नवाज शरीफ के खिलाफ निकाला था आजादी मार्च

साल 2013 में पाकिस्तान में आम चुनाव हुए और नवाज शरीफ की पीएमएल-एन को जीत मिली. नवाज शरीफ ही देश के प्रधानमंत्री बने. साल 2014 में जब उनकी सरकार का एक साल पूरा हुआ तो पीटीआई चीफ इमरान खान ने सरकार के खिलाफ आजादी मार्च निकाला.

इमरान खान के इस मार्च में काफी संख्या में लोग शामिल हुए. उस दौरान इमरान खान का सबसे बड़ा आरोप था कि पीएमएलएन ने आम चुनाव में गड़बड़ी की है.

कौन हैं मौलाना फजलुर रहमान

आपको बता दूं कि मौलाना फजलुर रहमान पाकिस्तान के कद्दावर नेता हैं और जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम के मौजूदा प्रेजिडेंट हैं. Fazal-ur-Rehman साल 2004 से लेकर 2007 तक पाकिस्तानी सांसद में विपक्ष के नेता था और 20 साल तक पाकिस्तान नैशनल असेंबली के सदस्य रहे हैं. 65 वर्षीय फजल-उर-रहमान ने वर्ष 1980 में 27 साल की उम्र में राजनीति में कदम रखा था.

फजलुर रहमान को तालिबान समर्थक नेता माना जाता है, हालांकि वे इसका खंडन करते रहे हैं, लेकिन इस्लामी कट्टरपंथी की उनकी छवि हमेशा उनके राजनीतिक करियर को प्रभावित करता रहा है. फजलुर रहमान पाकिस्तान में शरिया कानून स्थापित किए जाने की वकालत करते रहे हैं, हालांकि बाद में उन्होंने धर्मनिरपेक्ष दलों के साथ गठबंधन भी किया.

उल्लेखनीय है कि पिछले साल नवाज शरीफ की पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) समेत कई अन्य दलों ने फजलुर रहमान को राष्ट्रपति पद के लिए नॉमिनेट किया था और उन्हें 4 सितंबर को हुए राष्ट्रपति चुनाव में 184 वोट भी मिले और वह दूसरे नंबर पर रहे.

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