ब्रिटेन में उस आरोपी महिला टीचर को जेल हो सकती है, जिसने 10 साल के स्कूली छात्र की आंखों पर पहले तो पट्टी बांधी और उसे फिर बिस्तर पर भी बांध दिया. इसके बाद उसने सारी मर्यादा को लांघते हुए 10 साल के छात्र के साथ दुष्कर्म किया.कोर्ट में सुनवाई के बाद बताया जा रहा है कि अब इस महिला टीचर को गंभीर अश्लीलता का दोषी पाए जाने के बाद जेल की सजा हो सकती है.
कोर्ट में सुनवाई के दौरान जूरी ने हर्टफोर्डशायर के एक प्राइवेट स्कूल की पूर्व टीचर डेबोरा फ्रैंकलिन (65) को 1991 और 1995 के बीच 14 साल से कम उम्र के एक छात्र के साथ गंभीर अश्लीलता के आठ मामलों में दोषी पाया है.
पुराने नियमों के तहत होगी सजा
एक वीडियो इंटरव्यू में फिलहाल 40 साल के पीड़ित ने बताया कि जब वह फ्रैंकलिन की क्लास में शामिल हुआ था, तब वह 9 वर्ष का था. वह एक प्राइवेट स्कूल था जहां अब सालाना फीस £18,000 है, और वह उसकी प्राइवेट ट्यूटर बन गई थी. महिला टीचर डेबोरा फ्रैंकलिन के पुराने अपराध तब हुए थे जब हर मामले में अधिकतम सजा केवल 2 वर्ष की जेल थी. इसके बाद वर्ष 1997 में कानून बदला गया और अधिकतम सजा में इजाफा करके इसे 10 वर्ष कर दिया गया. एक्सपर्ट की मानें तो अब उसे पुराने नियमों के तहत सजा दी जाएगी.
अमीर परिवार से ताल्लुक रखता है पीड़ित
इस टीचर के खिलाफ मामला उसके पूर्व छात्र के विस्तृत और भावुक बयान पर आधारित था. छात्र ने बताया कि जब वह बच्चा था और टीचर की देखरेख में था, तब टीचर ने कई सालों तक उसे बहला-फुसलाकर उसका शोषण किया. अमीर परिवार से ताल्लुक रखने वाला पीड़ित इस शोषण के बाद कई सालों तक मानसिक सदमे में रहा. उसकी बड़ी बहन और भाई और स्कूल के एक दोस्त ने भी उसके बयान की पुष्टि करते हुए गवाही दी.
टीचर ने छात्र को पहचानने से किया इन्कार
जब पुलिस ने डेबोरा फ्रैंकलिन से पहली बार पूछताछ की तो उसने कहा कि उसे लड़का याद नहीं है, जबकि उनकी कई तस्वीरें थीं जिनमें वे एक-दूसरे का हाथ थामे हुए थे और एक बार स्कूल ट्रिप के दौरान उन्होंने हाथ भी पकड़ा था.
शिकायतकर्ता ने पुलिस और बाद में कोर्ट को बताया कि एक लोकप्रिय टीचर के साथ करीबी रिश्ते के तौर पर शुरू हुई बात बार-बार होने वाले संबंधों में बदल गई, जिसे वह कई सालों बाद ही पूरी तरह समझ पाया. 65 वर्षीय डेबोरा फ्रैंकलिन को 1991 और 1995 के बीच 14 साल से कम उम्र के एक लड़के के साथ गंभीर अश्लील हरकतें करने के आठ मामलों में दोषी पाया गया.
ट्यूशन देने के दौरान बन गई थी परिवार का हिस्सा
पीड़ित के अनुसार, प्राइवेट ट्यूशन देने के दौरान डेबोरा फ्रैंकलिन उसके परिवार का हिस्सा बनती जा रही थीं. उसने बताया कि वह शहर के बाहरी इलाके में बने उनके बड़े से घर में हमेशा मौजूद रहती थीं और इतना समय वहां बिताती थीं कि दशकों बाद भी उसे उनका फ़ोन नंबर याद है. अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि यह बढ़ती नजदीकी एक सोची-समझी ‘ग्रूमिंग’ प्रक्रिया का हिस्सा थी, जिसके ज़रिए टीचर और छात्र के बीच की मर्यादाएं खत्म हो गईं.