लंदन. ब्रिटेन की संसद ने ब्रेक्सिट समझौता मंगलवार को खारिज कर दिया. इसके बाद देश के यूरोपीय संघ (ईयू) से अलग होने की योजना पर और ज्यादा संशय के बादल मंडराने लगे हैं. पांच दिन चली बहस के बाद ब्रिटिश सरकार और ईयू के बीच समझौते के पक्ष में 202 वोट पड़े और इसके खिलाफ 432 वोट डाले गए. प्लान बी पेश करने के लिए ब्रिटेन की प्रधानमंत्री थेरेसा मे के पास तीन दिनों का वक्त है. ईयू से ब्रिटेन के अलग होने के लिए 29 मार्च की तारीख तय की गई है.

थेरेसा मे की इस करारी हार के बाद लेबर पार्टी के नेता जेरेमी कोर्बिन ने ब्रिटिश सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया. इस पर बुधवार को हाउस ऑफ कॉमन्स में चर्चा की जाएगी. इसके लिए थेरेसा मे ने सांसदो से एक बार और सोचने को कहा है. थेरेसा ने अपने सांसदों से कहा कि हम अपने देश के नागरिकों की भलाई के लिए ईयू से अलग हो रहे हैं. इसके पीछे कोई राजनीतिक सोच नहीं है.

नवंबर में यूरोपीय संघ के साथ ब्रेक्जिट समझौते पर सहमति बनी थी. दिसंबर में निचली सदन में इसके लिए मतदान होना था लेकिन थेरेसा मे ने हार की वजह से इसे टाल दिया था. इसके बाद से ही वो सांसदों को मनाने में जुटी थी. इन सबके बावजूद वह सांसदों का भरोसा जीतने में नाकाम रही हैं.  ब्रेक्जिट समझौता खारिज होने से थेरेसा मे को डर सता रहा है कि कहीं उनकी पार्टी के सदस्य उनका साथ न छोड़ दें. वहीं जेरेमी कोर्बिन ने कहा कि थेरेसा मे सरकार सांसदों की चिंताओं को दूर करने में पूरी तरह से नाकाम रही है. उन्होंने कहा कि थेरेसा मे के खिलाफ 24 घंटे अविश्वास प्रस्ताव लाना चाहिए और ब्रिटेन में फिर से मतदान होना चाहिए. बता दें कि बातचीत की प्रक्रिया 18 महीने चली थी और उसके बाद नवंबर में ईयू के साथ ब्रेक्जिट समझौते पर सहमति बनी थी.  

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