नई दिल्ली: म्यांमार से भागकर बांग्लादेश आए रोहिंग्या मुसलमानों के लिए अब महामारी सबसे बड़ी समस्या बन गई है. छोटे-छोटे बच्चे हैजा और खसरा जैसी बीमारियों की वजह से जान गवां रहे हैं. ईसाइयों के सबसे बड़े धर्मगुरु पोप फ्रांसिस रोहिंग्या मुसलमानों के बीच पहुंचे. इससे पहले राजधानी ढाका में उन्होंने एक प्रार्थना सभा को संबोधित किया जहां उन्होंने रोहिंग्या मुसलमानों की मदद करने के लिए बांग्लादेश सरकार का शुक्रिया अदा किया. हालांकि कई लोगों को इस बात से भी नाराजगी थी कि पोप फ्रांसिस ने अपने संबोधन में रोहिंग्या मुलमान शब्द का इस्तेमाल ना करते हुए उन्हें शरणार्थी कहा. पोप को सुनने के लिए ढाका में करीब 80 हजार से ज्यादा लोग जुटे थे.

रोहिंग्या मुसलमानों का मुद्दा काफी पेचीदा है. दरअसल म्यांमार रोहिंग्या मुसलमानों को अपना नागरिक नहीं मानता जिसकी वजह से बड़ी संख्या में रोहिंग्या मुसलमान बांग्लादेश के स्थाई शिविरों में गुजर-बसर करने पर मजबूर हैं. इन कैंपों के आस-पास बहुत गंदगी है जिसकी वजह से लगातार महामारी का खतरा बना हुआ है. पिछले 2 महीनों में खसरे के 600 से ज्यादा मामले सामने आए हैं. राहत कैंपों में बने अस्पतालों में लगातार भीड़ बढ़ रही है. डॉक्टरों के मुताबिक इस इलाके में रहने वाले लोगों को खसरा होने का सबसे ज्यादा खतरा है. ऐसा इसलिए क्योंकि ज्यादातर लोगों को टीका नहीं लगा है.

यही कारण है कि इन कैंपों में खसरे के सबसे ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं. खास तौर पर बच्चे सबसे ज्यादा खसरे की चपेट में हैं जिन्हें विटामिन ए दिया जा रहा है. फिलहाल पूरी दुनिया की नजर रोहिंग्या मुसलमानों पर लगी हुई है.

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