नेपिडॉ: म्यांमार की नई राजधानी नेपिडॉ में सबकुछ है लेकिन जो नहीं है वो है इंसान. इसके पीछे कारण ये है कि नेपिडॉ की तुलना ‘घोस्ट कैपिटल’ या ‘भुतहा शहर’ से की गई थी. अब आलम ये है कि यहां कोई आना ही नहीं चाहता. ऐसा नहीं है कि इस शहर को खूबसूरत नहीं बनाया गया है. चार हजार वर्ग किलोमीटर के इलाके में फैले इस शहर में 20 लेन वाली सड़के हैं जहां दो हवाई जहाज़ एक साथ, अगल-बगल, लैंड कर सकते हैं. इस शहर में 100 से भी ज़्यादा चमचमाते होटल हैं.

म्यांमार की इस नई राजधानी को बनाने में करीब 26,000 करोड़ रुपए खर्च हुए थे. लेकिन यहां कभी सड़कों पर ट्रॉफिक जाम नहीं लगता है क्योंकि सड़कों पर ज्यादा लोग ही नहीं होते. गौरतलब है कि सदियों से म्यांमार की राजधानी मांडले थी जिसे 1948 में यांगोन शिफ्ट कर दिया गया था. हालांकि ये अभी तक साफ नहीं है कि राजधानी शिफ्ट करने का फैसला किसका था. 

वरिष्ठ पत्रकार सुबीर भौमिक के मुताबिक ‘दूसरा इराक युद्ध शुरू होने के पहले ऐसा माहौल बन गया था. ऐसे में बर्मा की सेना को को लगा कि अगर हमला हुआ तो यांगोन पर तो तुरंत ही कब्जा हो जाएगा क्योंकि भौगोलिक स्थित के मुताबिक शहर तट पर है. इसलिए म्यांमार की सेना को लगा कि लगा कि राजधानी यहां से हटा लेनी चाहिए. इसके अलावा एक कारण ये भी है कि म्यांमार की फौज और आम जनता ज्योतिष शास्त्र पर बहुत यकीन रखते हैं और ज्योतिषियों ने कहा कि ये वास्तु के हिसाब से बेहतर लोकेशन है और आप लोग वहां जाएं.

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