अंतरिक्ष विज्ञान और भारतवंशी प्रतिभाओं के संदर्भ में यह एक बेहद गर्व का क्षण है. भारतीय मूल के नासा (NASA) अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन ने अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (ISS) से बाहर निकलकर अपने करियर का पहला ऐतिहासिक स्पेसवॉक्स पूरा किया है.
इस चुनौतीपूर्ण 6.5 घंटे के मिशन (एक्स्ट्रावेहिकुलर एक्टिविटी या EVA) में उनके साथ नासा की अनुभवी अंतरिक्ष यात्री जेसिका मेयर (Jessica Meir) भी शामिल थीं, जिनका यह छठा स्पेसवॉक्स था. दोनों ने मिलकर स्पेस स्टेशन के पावर सिस्टम को अपग्रेड करने का एक बेहद अहम काम सफलतापूर्वक पूरा किया.
मिशन की प्रमुख बातें
अनिल मेनन और जेसिका मेयर की इस जोड़ी का मुख्य उद्देश्य स्पेस स्टेशन के ‘3B पावर चैनल’ पर नए हार्डवेयर इंस्टॉल करना था. यह काम आने वाले समय में नए सोलर पैनल्स (iROSA) को लगाने की तैयारी के तहत किया गया है.
क्यों जरूरी है यह अपग्रेड?
अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन पर लगे पुराने सोलर पैनल वक्त के साथ कमजोर पड़ने लगे हैं. नए और आधुनिक सोलर पैनल्स लगने के बाद स्पेस स्टेशन की बिजली उत्पादन क्षमता में भारी इजाफा होगा. इससे वहां चल रहे वैज्ञानिक प्रयोगों और लाइफ-सपोर्ट सिस्टम्स को बिना किसी रुकावट के बिजली मिलती रहेगी.
स्पेसवॉक्स की चुनौतियां
- अंतरिक्ष के निर्वात (Vacuum) में काम करना बेहद खतरनाक और मुश्किल होता है.
- अंतरिक्ष यात्रियों को लगभग 28,000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पृथ्वी का चक्कर लगाते हुए काम करना पड़ता है.
- इस दौरान उन्हें अत्यधिक गर्म और बेहद ठंडे तापमान की चरम स्थितियों का सामना करते हुए हर एक कदम पूरी सावधानी और सुरक्षा के साथ उठाना होता है.
अगस्त में तीन बड़े मिशन
यह स्पेसवॉक्स इस महीने (अगस्त) में तय तीन बड़े मिशनों की श्रृंखला में पहला कदम था:
- पहला स्पेसवॉक्स: पावर अपग्रेड (सफलतापूर्वक पूरा).
- 13 अगस्त: कम्यूनिकेशन एंटीना बदलने का मिशन.
- 25 अगस्त: डेटा रिले सिस्टम को अपग्रेड करने का काम.
अनिल मेनन का सफर
अमेरिका में जन्मे अनिल मेनन के पिता भारतीय और मां यूक्रेनियन हैं. नासा में चयन से पहले वे एक फिजीशियन, मैकेनिकल इंजीनियर और स्पेसएक्स (SpaceX) के पहले फ्लाइट सर्जन के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं.
ऐसे समय में जब भारत अपने महत्वाकांक्षी गगनयान (Gaganyaan) मिशन की तैयारियों में जुटा है, अनिल मेनन जैसे भारतीय मूल के दिग्गजों की यह उपलब्धि देश को एक अलग ही पहचान दिलाती है. कल्पना चावला और सुनिता विलियम्स के बाद अब अनिल मेनन भी अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया में भारत का नाम रोशन कर रहे हैं.