ढाका. साल 1971 में मुक्ति संग्राम के दौरान युद्ध अपराध के दोषी दो शीर्ष विपक्षी नेताओं को बांग्लादेश की ढाका सेंट्रल जेल में शनिवार रात फांसी दी गई. बता दें कि इन दोनों नेताओं की दया याचिका बांग्लादेश के राष्ट्रपति ने खारिज कर दी थी.

सजा पर अमल से कुछ घंटे पहले दोनों नेताओं ने फांसी के फंदे से बचने के अंतिम प्रयास में राष्ट्रपति से गुहार लगाई थी, लेकिन राष्ट्रपति अब्दुल हामिद ने उनकी दया याचिकाएं खारिज कर दीं.

फांसी के बाद जेल के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि चरमपंथी जमात-ए-इस्लामी के महासचिव अली एहसान मोहम्मद मुजाहिद (67) और बीएनपी नेता सलाहुद्दीन कादर चौधरी (66) को देर रात 12 बजकर 45 मिनट पर फांसी दी गई.

बता दें कि मुजाहिद और चौधरी को मिलाकर बांग्लादेश में अब तक युद्ध अपराध के चार दोषियों को फांसी दी जा चुकी है. जेल सूत्रों ने कहा कि जल्लादों के सात सदस्यीय दल ने दोषियों को फांसी दी.

 

 

 

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