जकार्ता. इंडोनेशिया में एक लाख से ज्यादा खेत और जंगलों में लगी आग के कारण दक्षिण पूर्व एशियाई देशों में ग्लोबल वार्मिंग, कार्बन इमिशन और लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा पैदा हो गया है. इंडोनेशिया में किसान पाम ऑयल की खेती के लिए जमीन बनाने के मकसद से आम तौर पर जंगलों में आग लगा देते हैं.
 
नासा के मुताबिक इस साल इंडोनेशिया में 1 लाख 17 हजार से ज्यादा खेत और जंगलों में आग लगा है. इंडोनेशिया में ताड़ के तेल की खेती के लिए किसान जमीन निकालने की मंशा से आग लगा देते हैं लेकिन इस बार समस्या इतनी भयावह हो गई है कि इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो अमेरिका की यात्रा एक दिन पहले ही खत्म करके लौट गए हैं.
 
इंडोनेशिया सरकार ने सुमात्रा और कालीमंटन इलाके में आग पर काबू पाने के काम में 2000 से ज्यादा सैनिकों और 500 से ज्यादा पुलिस अधिकारियों को लगाया है. ये लोग फायर फाइटर्स की मदद कर रहे हैं.
 
पर्यावरण विशेषज्ञों के मुताबिक इतनी बड़ी संख्या में आग के कारण जंगल को जो नुकसान हुआ है वो तो अपनी जगह है ही, उसके साथ ही लोगों के स्वास्थ्य पर भी इसका गहरा असर पड़ रहा है. इंडोनेशियाई जंगलों से इस बार इतना कार्बन डाइऑक्साइड पैदा हुआ है जो जर्मनी पूरे साल में पैदा करता है.
 
इंडोनेशिया की आग और उसके धुएं का असर इतना व्यापक है कि पड़ोसी देश मलेशिया, सिंगापुर, थाईलैंड और फिलीपींस में विजिबलिटी कम होने के कारण कई उड़ानें रद्द करनी पड़ी हैं और धुएं की वजह से स्कूल भी बंद करने पड़े हैं. इससे समझा जा सकता है कि देश के अंदर रह रहे लोगों को कितनी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा होगा.
 
वैसे, मंगलवार को इंडोनेशिया में हुई बारिश के कारण कई जगहों पर आग पर काबू पा लिया गया है लेकिन इंडोनेशियाई अधिकारियों के मुताबिक लगातार एक सप्ताह तक बारिश होने पर ही आग पर पूरी तरह काबू पाया जा सकेगा.

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