रियाद. सीरिया के नन्हे बच्चे आयलान कुर्दी की मौत ने पूरी दुनिया में शरणार्थियों की समस्या पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. मीडिया में सीरियाई लोगों को मध्य एशिया देशों जैसे सऊदी अरब में शरण न देने के आरोप में सऊदी ने सफाई देते हुए कहा है कि  सीरिया संकट के बाद से उसने 25 लाख सीरियाई नागरिकों को पनाह दी है. एक सरकारी बयान में कहा गया है कि अब तक 10,00,000 सीरियाई छात्रों को दाखिला दिया जा चुका है. सऊदी ने कहा है कि  इसके अलावा उसने सीरियाइयों पर 70 करोड़ डॉलर खर्च किए हैं. 
 
 
सऊदी अरब का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब यूरोप में शरणार्थी संकट गहराता जा रहा है और अपने देशों से पलायन कर रहे सीरियाई शरणार्थियों की बढ़ती संख्या से निपटने के लिए विश्व खाड़ी देशों से आग्रह कर रहा है. 
 
 
 
गौरतलब है कि 2011 से शुरू हुए सीरिया संकट में अब तक 2,40,000 से भी अधिक लोगों की जान जा चुकी है और लाखों लोग सीरिया से पलायन कर चुके हैं. सीरिया से जान बचा कर भागने कि लिए लोग ट्रेन, पैदल या फिर मानव तस्करों तक की मदद ले रहे हैं. इस बीच कई सीरियाई रास्ते में ही मर जाते हैं.
 
 
मीडिया में सीरियाई लोगों को मध्य एशिया देशों जैसे सऊदी अरब में शरण न देने के कारण सऊदी अरब, कुवैत जैसे देशों की बहुत किरकिरी हुई थी. विश्व पटल के सामने यह बहस छिड़ गयी कि आखिर ऐसे क्या कारण हैं जिससे सऊदी अरब जैसे देशों में लोग नहीं जा रहे हैं जबकि उनकी संस्कृति, सभ्यता इन्हीं देशों से मेल खाती है.
 
 
 
 
 
आपको बता दें कि 2011 से शुरू हुए सीरिया संकट में अब तक 2,40,000 से भी अधिक लोगों की जान जा चुकी है. शरणार्थियों का पलायन करने का रास्ता छोटा नहीं है. सीरिया से तुर्की, वहां से बुल्गारिया, फिर सर्बिया, हंगरी और फिर ऑस्ट्रिया से होते हुए वे जर्मनी पहुंचते हैं. इस साल के अंत तक जर्मनी 8,00,000 शरणार्थियों को पनाह दे चुका है.
 
 
 
 
IANS
 
  
 
 
  

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