नई दिल्ली. कश्मीर में मानवाधिकार की दुहाई देने वाले पाकिस्तान को बलूचिस्तान पर घिरता देखा जा रहा है. भारत के बाद यूरोपीय यूनियन ने बलूच लोगों का समर्थन में आ गया है. यूरोपीय यूनियन पाकिस्तान पर आर्थिक और राजनीतिक पाबंदी लगा सकता है. यूरोपीयन पार्लियामेंट के वाइस प्रेसीडेंट रिसजार्ड जारनेकी ने कहा है कि अगर पाकिस्तान बलूचिस्तान में मानवाधिकारों का उल्लंघन नहीं रोक पाया तो EU उस पर पांबदी लगाने का फैसला ले सकता है. 
 
इनख़बर से जुड़ें | एंड्रॉएड ऐप्प | फेसबुक | ट्विटर
 
जारनेकी ने कहा है कि बलूचिस्तान में हो रही घटनाओं के बारे में EU को जानकारी है, अगर पाकिस्तान बलूचिस्तान में मानवाधिकारों का उल्लंघन नहीं रोक पाया तो हम पाकिस्तान पर आर्थिक और राजनीतिक पाबंदी लगाने का फैसला ले सकते हैं. पाकिस्तान के अत्याचारों के खिलाफ एक प्रदर्शन में जारनेकी ने जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि दी. उन्होंने कहा कि यह वक्त बोलने का नहीं, कुछ करने का है. 
 
 
जारनेकी ने कहा कि EU के पाकिस्तान के साथ आर्थिक और राजनीतिक संबंध हैं और अगर पाकिस्तान बलूचिस्तान को लेकर अपनी नीतियों को नहीं बदलता है तो हमें भी पाकिस्तान के प्रति अपना रवैया बदलना पड़ेगा. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के दो चेहरे हैं. एक चेहरा पाकिस्तान का हमें दिखाने के लिए है और दूसरा क्रूर चेहरा बलूचिस्तान के लिए. 
 
 
बलूच नेता ब्रह्मदह बुगती ने भारत में शरण की याचिका दाखिल कर दी है. बुगती की याचिका गृह मंत्रालय को मिल गई है. ये याचिका विदेश मंत्रालय के जरिए मिली है. बुग्ती ने भारतीय कागजातों की मदद से पूरी दुनिया घूमकर पाकिस्तान के खिलाफ बलूचिस्तान की आजादी को लेकर अपनी आवाज उठाना चाहते हैं. बलोच नेता बुगती ने जेनेवा में भारतीय राजनयिकों से मुलाकात कर शरण की शर्तों पर बातचीत भी की.
 
 
15,000 बलूच लोगों ने अफगानिस्तान में शरण लेने की कोशिश में हैं और 2000 बलूच लोग दुनिया के कई देशों में शरण लेने के लिए आवेदन कर रहे हैं. वहीं पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने कहा है कि बलूच नेता बुगती एक आतंकवादी है और भारत उसे शरण न दे.