न्यूयार्क. अंतराष्ट्रीय राजनीति में एक बात हमेशा से कही जाती है दुश्मन का दुश्मन हमेशा दोस्त होता है. जी हां चीन ने इस बात को सार्थक किया और भारत का दुश्मन पाकिस्तान को अपना दोस्त बताते हुए कहा कि चीन और पाकिस्तान एक मजबूत रणनीतिक भागीदार हैं और दोनों देशों की दोस्ती अटूट है. 
 
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यूएन महासभा में भाग लेने के लिए न्यूयॉर्क गए पाकिस्तानी पीएम नवाज शरीफ ने बुधवार को अपने चीनी प्रधान ली केकियांग से मुलाकात की. इस पूरे बैठक के दौरान कश्मीर और हाल में ही उड़ी में सेना मुख्यालय पर हुए आतंकी हमले का मुद्दा चीन की सरकारी मीडिया कवरेज से गायब रहा.
 
चीन की सरकारी न्यूज एजेंसी शिन्हुआ ने खबर दी है कि संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र के इतर चीनी पीएम केकियांग और पाकिस्तानी पीएम नवाज शरीफ की मुलाकात हुई और इस दौरान केकियांग ने कहा कि दोनों देश एक मजबूत रणनीतिक भागीदार हैं जो एक दूसरे के सहयोग मजबूती से समर्थन करते हैं और दोनों देशों की दोस्ती अटूट है.
 
चीन के पीएम ने कहा कि चीन पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों को और नई ऊचाइंयों पर ले जाने के लिए तैयार हैं. शिन्हुआ की रिपोर्ट के मुताबिक ली ने शरीफ से आग्रह किया कि दोनों देशों को औद्योगिक पार्क में और अधिक कंपनियों का निर्माण करना चाहिए.
 
केकियांग ने कहा कि चीन पाकिस्तान के साथ क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर अपने संबंधों को और गहरा करना चाहता है. शिन्हुआ के अनुसार, इस मुलाकात के दौरान कश्मीर और उड़ी हमले के बारे में कोई जिक्र नहीं किया गया जैसा कि पाकिस्तानी मीडिया दावा कर रही है.
 
इससे पहले पाकिस्तानी अखबार ‘डॉन’ ने दावा करते हुए कहा था, ‘चीनी पीएम ने पाकिस्तान को भरोसा देते हुए कहा कि वो कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान के साथ हैं. हम कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान का समर्थन करते हैं और इसके लिए हर मंच पर पाकिस्तान के सपोर्ट में चीन बोलेगा.
 
पाकिस्तानी मीडिया ने दावा किया करते हुए कहा था, चीनी पीएम ने उम्मीद जताई है कि भारत और पाकिस्तान के बीच स्थिति और खराब नहीं दी जाएगी.हम लोग पाकिस्तान और भारत के बीच रिश्तों को सुधारने कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाएंगे.
 
‘डॉन’ के मुताबिक, ली केकियांग ने कहा था, ‘हम लोग पाकिस्तान में चीन के लोगों की सुरक्षा एवं संरक्षा के लिए बहुत अधिक संसाधन खर्च करने के लिए प्रधानमंत्री मोहम्मद नवाज शरीफ के आभारी हैं. दोनों देशों को बीच मजबूत संबंध बनाने के लिए खास योजना बनाई जा रही है ताकि दोनों देशों के द्वपक्षिय संबंध मजबूत किए जाएं.