ढाका. बांग्लादेश में कट्टरपंथी जमात-ए-इस्लामी नेता मोतीउर रहमानी निजामी को मंगलवार की रात को फांसी पर लटका दिया गया है. निजामी पर 1971 में बांग्लादेश की आजादी की लड़ाई के समय मानवता के खिलाफ अपराध करने का आरोप था.
 
फांसी की सजा पर एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि 73 वर्षीय निजामी को ढाका सेंट्रल जेल में मध्यरात्री 12 बजे फांसी पर लटकाया गया है. निजामी ने राष्ट्रपति से क्षमादान मांगने से इनकार कर दिया था.
 
बांग्लादेश के गृहमंत्री के मुताबिक निजामी से कहा गया था कि वह राष्ट्रपति से क्षमा मांगते हुए अगर अपना गुनाह कबूल कर लेता है तो उसकी मौत की सजा माफ की जा सकती है. लेकिन निजामी ने दया याचिका भेजने से मना कर दिया. 
 
निजामी को करीब 20 मिनट तक फांसी पर लटका रहने देने के बाद एक सर्जन ने उसे मृत घोषित कर दिया. वह साल 2010 से कानूनी लड़ाई लड़ रहा था. फांसी के पहले जेल के आस पास सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए गए थे.
 
बता दें कि निजामी के ऊपर अपराधिक षड्यंत्र, 450 लोगों की हत्या, 30-40 महिलाओं का बलात्कार और हिंदुओं को वापस भेजना जैसे अपराधों के साथ साथ 27 नवंबर 1971 को संथिया के धुलौरा गांव में 30 लोगों की हत्या करवाने का भी आरोप था.

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