बीजिंग. चीन में राष्ट्रपति शी जिनपिंग की सरकार ने चीन की सोसायटी में विदेशी प्रभाव को देखते हुए एक अहम फैसला लिया है. सरकार ने एक नया कानून लागू करते हुए विदेशी संगठनों को और उसके लोकल पार्टनर्स के कार्यों को सीमित करने का कदम उठाया है. और वह पुलिस की निगरानी के माध्यम से भी कानून को कड़ाई से लागू करेगी. इस कानून के आ जाने के बाद से लगभग 7,000 विदेशी गैर सरकारी समूह प्रभावित होंगे.
 
चीन में पर्यावरण, परोपकार, सांस्कृतिक के आदान-प्रदान और यहां तक शिक्षा और व्यापार के क्षेत्र में काम करने वाले समूहों को अब एक आधिकारिक चीनी प्रायोजक ढूंढना होगा और साथ ही साथ पुलिस के साथ रजिस्टर भी कराना होगा. यह नियम ताइवान, हांगकांग और मकाऊ के समूहों पर भी लागू होगा. 
 
ऐसे समूह जिनके पास आधिकारिक स्वीकृति नहीं होगी उन्हें चीन में काम करने का मौका नहीं मिलेगा. वह समूह जो मजदूरों के अधिकारों, जातीय समानता और धार्मिक स्वतंत्रता के लिए काम करते हैं उन्हें आधिकारिक स्वीकृति मिलने में काफी परेशानी हो सकती है.
 
कहा यह जा रहा है कि यह नया कानून इसलिए लाया गया है क्योंकि राष्ट्रपति शी जिनपिंग और दूसरे नेताओं की नजर में विदेशी प्रभाव बढ़ने की वजह से चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी के अस्तित्व को खतरा हो सकता है.
 
इस फैसले ने विदेशी और चीनी गैर सरकारी संगठनों में चिंता पैदा कर दी है. अमेरिका ने चीन के इस फैसले पर ‘गहरी चिंता’ जतायी है. व्हाइट हाउस में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रवक्ता नेड प्राइस ने चीन से आग्रह किया कि वह मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ,पत्रकारों, व्यापार समूहों और दूसरों के अधिकारों और स्वतंत्रता का सम्मान करे. उन्होंने कहा, ‘चीन को वहां काम करने वाली विदेशी एनजीओ का सम्मान करना चाहिए और साथ ही साथ उन्हें सुरक्षा  भी मुहैया कराना चाहिए’.
 

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