लंदन. टाटा स्टील द्वारा ब्रिटेन का कारोबार बेचने की घोषणा ने ब्रिटेन की सरकार को हतप्रभ कर दिया है और माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री डेविड कैमरन वाशिंगटन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने यह मुद्दा उठा सकते हैं. दोनों नेता  परमाणु सुरक्षा सम्मेलन में शामिल होने के लिए वाशिंटन डीसी में उपस्थित रहेंगे.
 
समाचारपत्र ‘द गार्जियन’ की रिपोर्ट के मुताबिक, टाटा स्टील के ब्रिटिश कारोबार बेचे जाने से 40 हजार कर्मचारियों की नौकरी खतरे में पड़ गई है और अपने मंत्रियों से इस विषय पर बात करने के लिए कैमरन वापस लंदन आ चुके हैं. 
 
रिपोर्ट में एक सूत्र के हवाले से कहा गया है कि चीन के सस्ते आयात को रोकने के लिए शुल्क बढ़ाने की मांग पूरा करने में सरकार की विफलता के कारण टाटा स्टील को रोजाना एक करोड़ पाउंड का नुकसान हो रहा है, जिस कारण कंपनी को ब्रिटिश कारोबार को बेचने का फैसला करना पड़ा. लेबर पार्टी ने इसे राष्ट्रीय संकट बताकर इस्पात कारोबार के राष्ट्रीयकरण करने की जरूरत बताई. 
 
रिपोर्ट के मुताबिक, व्यापार मंत्री साजिद जाविद ने हालांकि इस विचार को खारिज कर दिया है और कहा है कि इससे सरकार को सालाना 1.5 अरब पाउंड खर्च करना होगा. रिपोर्ट के अनुसार, कैमरन संभवत: इस विषय पर मोदी से चर्चा कर सकते हैं. टाटा के ब्रिटिश कारोबार का मूल्य दो अरब पाउंड घट चुका है. रिपोर्ट में कंपनी के वित्त निदेशक कौशिक चटर्जी के हवाले से कहा गया है कि यूके कारोबार एक भार है और कंपनी इसे जारी नहीं रख सकती. 
 
यूके कारोबार में करीब तीन अरब डॉलर का नुकसान झेलने के बाद कंपनी ने कहा कि वह ब्रिटेन के समस्त इस्पात कारोबार को बेचने का विकल्प तलाशेगी. टाटा स्टील ने करीब 10 साल पहले 8.1 अरब डॉलर में एंग्लो-डच कंपनी कोरस का अधिग्रहण करने के बाद यूरोपीय बाजार में प्रवेश किया था.

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