इस्लामाबाद. सऊदी अरब द्वारा आतंकवाद से लड़ने के लिए बनाए गए 34 देशों के सैनिक संगठन ने पाकिस्तान को मुश्किल में डाल दिया है. पाकिस्तान के विदेश सचिव अजीज़ चौधरी ने साफ़ कर दिया है कि सऊदी ने इस संगठन में पाकिस्तानी हिस्सेदारी पर उनसे किसी तरह की सलाह नहीं ली है. अजीज़ ने कहा कि पाक सरकार खुद सऊदी की इस घोषणा से सकते में है.
 
क्या है मुश्किल 
आपको बता दें कि पाकिस्तान की नीति रही है कि यूनाइटेड नेशंस के शांति मिशन को छोड़कर पाकिस्तानी सेना किसी भी तरह के सैन्य अभियानों में हिस्सा नहीं लेती है. सीरिया में आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट के खिलाफ जारी नाटो और यूरोपीय देशों की लड़ाई में भी अमेरिका ने पाकिस्तान ने सैन्य समर्थन की अपील की थी जिसे पाकिस्तान ने यही तर्क देकर ठुकरा दिया था.
 
अब अगर पाकिस्तान इस संगठन में हिस्सेदार रहता है तो उसे आतंकवाद के खिलाफ सैन्य अभियानों में हिस्सा लेना होगा जबकि ऐसे ही अभियानों के लिए उसने अमेरिका से इनकार कर दिया था. सऊदी की इस हरक़त से पाकिस्तान लगभग दोराहे पर खड़ा नज़र आ रहा है.
 
ये देश हैं शामिल:
 
 
सऊदी ने पहले भी किया है ऐसा
गौरतलब है कि यमन में जारी लड़ाई के लिए बने मुस्लिम देशों के संगठन में भी सऊदी ने इसी तरह पाकिस्तान को बिना पूछे शामिल कर लिया था. यहां तक कि संगठन के हेडक्वार्टर पर भी अन्य देशों के साथ पाकिस्तान का झंडा लगा दिया गया था. हालांकि पाकिस्तान ने बाद में यमन में जारी युद्ध में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया था. 
 
पाकिस्तान आर्मी ने अलाइंस से किया इनकार
पाकिस्तान आर्मी के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल असीम बाजवा ने भी साफ़ कर दिया है कि फिलहाल सेना पाकिस्तानी क्षेत्र में जारी अभियानों के अलावा विदेशी धरती पर प्रस्तावित किसी भी तरह के अभियान में हिस्सा लेने की योजना पर विचार नहीं कर रही है.

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