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शिवजी के 8 असुर भक्त: जिनकी तपस्या से पिघल गए थे भोलेनाथ!

रावण लंका के राजा रावण ने शिवजी को प्रसन्न करने के लिए अपने सिर काट कर अर्पित कर दिए थे, शिवजी ने उसे अमरत्व का वरदान (नाभि में अमृत), अतुल्य शक्ति और एक अजय तलवार (चंद्रहास) दी थी

भस्मासुर इस असुर ने शिवजी को प्रसन्न कर यह वरदान पाया था कि वह जिसके भी सिर पर हाथ रखेगा, वह भस्म हो जाएगा, बाद में भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण कर उसका अंत किया था

त्रिपुरासुर तारकाक्ष, कमलाक्ष और विध्युन्माली, तीनों भाइयों ने ब्रह्माजी से तीन अजेय उड़ने वाले पुर (नगर) मांगे थे, जिन्हें केवल शिवजी ही एक विशेष बाण से नष्ट कर सकते थे, शिवजी ने इन्हें त्रिपुर का वरदान दिया, जिसके कारण वे अत्यंत शक्तिशाली हो गए थे

बाणासुर हजार भुजाओं वाले इस असुर ने शिवजी की घोर तपस्या की थी, शिवजी ने उसे अजेय होने का वरदान दिया था और स्वयं उसके राज्य (शोणितपुर) की रक्षा करने का वचन दिया था

गजासुर इस असुर की तपस्या से प्रसन्न होकर शिवजी ने उसे वरदान दिया था कि उसका शरीर हमेशा अग्नि से सुरक्षित रहेगा और उसने शिवजी को अपने उदर (पेट) में रहने का वरदान भी मांग लिया था

अंधकासुर शिवजी के पसीने से उत्पन्न इस पुत्र (जो बाद में असुर बना) ने वरदान पाया था कि उसके रक्त की हर एक बूंद जो धरती पर गिरेगी, उससे एक नया अंधकासुर पैदा हो जाएगा

जलंधर समुद्र से उत्पन्न इस शक्तिशाली असुर ने कठिन तपस्या कर अजेय होने का वरदान पाया था, उसकी शक्ति का मुख्य स्रोत उसकी पतिव्रता पत्नी 'वृंदा' का पातिव्रत धर्म था

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