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क्या AI खा जाएगा आपकी नौकरी? रोबोट्स को ट्रेनिंग दे रहे भारतीय कर्मचारी

क्या AI खा जाएगा आपकी नौकरी? रोबोट्स को ट्रेनिंग दे रहे भारतीय कर्मचारी

रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय वर्कर काम करते समय अपने सिर, हाथों और पैरों पर सेंसर पहन रहे हैं ताकि मशीनें उनके रोज के कामों को सीख सकें. 

क्या उनकी नौकरी चली जाएगी?

हजारों भारतीय वर्कर कैमरे और सेंसर का इस्तेमाल करके अपने रोज के कामों को रिकॉर्ड कर रहे हैं. इस डेटा का इस्तेमाल AI पावर्ड रोबोट को ट्रेनिंग देने के लिए किया जा रहा है.

भविष्य के लिए रोबोट को ट्रेनिंग देना

रोबोट को ट्रेनिंग देने के लिए डेटा बहुत जरूरी है. इसे इकट्ठा करने के लिए, वर्कर सिर पर लगे कैमरे पहनते हैं और अपने नजरिए से अपने कामों को रिकॉर्ड करते हैं.

फर्स्ट-पर्सन डेटा

कई वर्करों के लिए, यह काम उनकी रेगुलर नौकरी से ज्यादा पैसे देता है. रिपोर्ट्स बताती हैं कि कुछ लोग अपने काम को रिकॉर्ड करने के लिए ₹250 प्रति घंटे तक कमाते हैं.

रिकॉर्डिंग से ज्यादा कमाई

ह्यूमनॉइड रोबोट इंडस्ट्री तेजी से बढ़ रही है. फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स का मानना है कि 2050 तक दुनिया भर में एक अरब से ज्यादा रोबोट इस्तेमाल में हो सकते हैं.

एक बढ़ता हुआ ग्लोबल मार्केट

जबकि कुछ वर्कर अपने कामों को घर पर रिकॉर्ड करते हैं, दूसरों को खास स्टूडियो में लाया जाता है जहां वे डेटा इकट्ठा करने के लिए एक ही काम को कई बार दोहराते हैं.

स्टूडियो में रिकॉर्डिंग

कंपनियां सिर्फ वीडियो फ़ुटेज ही इकट्ठा नहीं करतीं. वर्करों के हाथों और पैरों पर मोशन सेंसर भी लगाए जाते हैं ताकि उनकी गतिविधियों का डिटेल्ड डेटा कैप्चर किया जा सके.

सिर्फ वीडियो से कहीं ज्यादा

हालांकि यह टेक्नोलॉजी रोज़गार के नए मौके पैदा कर रही है, लेकिन कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि भविष्य में इससे बड़ी संख्या में वर्किंग-क्लास की नौकरियां भी जा सकती हैं.

नौकरियां जा सकती हैं

कई वर्करों के लिए, यह काम उनकी रेगुलर नौकरी से ज्यादा पैसे देता है. रिपोर्ट्स बताती हैं कि कुछ लोग अपने काम को रिकॉर्ड करने के लिए ₹250 प्रति घंटे तक कमाते हैं.

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