राजस्थान के चूरू जिले से एक हैरान कर देने वाली और सरकारी व्यवस्था की पोल खोलने वाली घटना सामने आई है. यहां के सुजानगढ़ स्थित सरकारी फतेहमपुरीया मातृ एवं शिशु अस्पताल (Government Fatehpuriya Maternity and Child Hospital) में इलाज कराने आई एक महिला उस वक्त बाल-बाल बच गई, जब अस्पताल के मुख्य गेट पर अचानक छत का भारी-भरकम प्लास्टर भरभरा कर नीचे आ गिरा. इस भयानक हादसे में मलबे की चपेट में आने से एक महिला गंभीर रूप से घायल हो गई, जिसके सिर में गहरी चोट आई है. यह पूरी खौफनाक घटना वहां लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई, जिसका वीडियो अब तेजी से वायरल हो रहा है. गनीमत यह रही कि हादसे के वक्त वहां ज्यादा भीड़ नहीं थी, वरना एक बड़ा जानलेवा हादसा हो सकता था.
जर्जर इमारत और लापरवाही की खुली पोल
अस्पताल के इस खस्ताहाल एक बार फिर प्रशासनिक लापरवाही और मरीजों की सुरक्षा पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं. अधिकारियों के मुताबिक, यह मेटरनिटी हॉस्पिटल फिलहाल पुरानी ट्रामा सेंटर की इमारत से चलाया जा रहा है, जो लंबे समय से अपनी बदहाली के लिए चर्चा में है. स्थानीय लोगों, मरीजों और उनके तीमारदारों ने कई बार इस जर्जर बुनियादी ढांचे और अस्पताल प्रशासन की अनदेखी की शिकायत की थी, लेकिन प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया. इस ताजा हादसे के बाद से अस्पताल में आने वाले मरीजों और मेडिकल स्टाफ के दिलों में भी डर बैठ गया है. हर कोई यही कह रहा है कि यह जर्जर इमारत कभी भी किसी बड़ी तबाही को न्योता दे सकती है.
अस्पताल में मची चीख-पुकार, अधिकारियों पर उठे सवाल
लोकमत टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, प्लास्टर गिरने की इस अचानक हुई घटना से अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी मच गई. तेज आवाज सुनकर मरीज, उनके परिजन और अस्पताल का स्टाफ अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे. हर तरफ चीख-पुकार और डर का माहौल बन गया. हादसे के तुरंत बाद अस्पताल प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाते हुए घायल महिला को तुरंत राजकीय बगड़िया उप-जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां उसका इलाज जारी है.
राजस्थान के चुरू जिले में एक महिला मरीज अपना इलाज कराने सरकारी अस्पताल में आई थी। डॉक्टर तो बाद में देखते, पहले ऊपर से मौत आने को तैयार थी। pic.twitter.com/Rx09Vgpqbl
— Sachin Gupta (@Sachingupta) August 5, 2026
घटना के तूल पकड़ने के बाद स्थानीय लोगों ने अस्पताल की बिल्डिंग का तुरंत टेक्निकल सर्वे कराने और या तो तत्काल मरम्मत कराने या अस्पताल को किसी सुरक्षित जगह शिफ्ट करने की जोरदार मांग की है. वहीं, इस पूरे मामले पर अस्पताल के सुपरवाइजर डॉ. बंशीधर ने सफाई देते हुए कहा कि जर्जर इमारत की इस समस्या के बारे में उच्च अधिकारियों को पहले ही लिखित में अवगत कराया जा चुका था. उन्होंने भरोसा दिलाया है कि संरचनात्मक सुधारों पर काम किया जा रहा है ताकि ऐसी घटनाओं को दोबारा रोका जा सके. सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है?
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