इन दिनों सोशल मीडिया पर एक ऐसा हैरान करने वाला वीडियो वायरल हो रहा है, जिसे देखकर हर कोई दंग रह गया है! मामला एमपी-यूपी बॉर्डर के पास मड़ावरा तहसील के गिरार इलाके का है, जहां धसान नदी के पास दिगंबर जैन आर्यिका विदुषश्री माताजी के सामने करीब 4 फीट लंबा एक काला कोबरा (Black Cobra) आकर बैठ गया. खास बात यह रही कि करीब 3 मिनट तक यह खतरनाक सांप फन फैलाकर बिल्कुल शांत मुद्रा में खड़ा रहा और जैन साध्वी नमोकार मंत्र का जाप करती रहीं.
विहार के दौरान सांप से वार्तालाप
जानकारी के मुताबिक, रविवार सुबह करीब 8 बजे आर्यिका विदुषश्री माताजी अपनी साथी साध्वियों के साथ विहार (भ्रमण) पर निकली थीं. धसान नदी के पुल के पास अचानक उन्हें यह जहरीला कोबरा दिखाई दिया. सांप को देखकर वहां मौजूद लोग सहम सकते थे, लेकिन साध्वियों ने बिना डरे संयम दिखाया. माताजी ने बिल्कुल शांत भाव से खड़े होकर नमोकार मंत्र का जाप शुरू कर दिया और उससे प्यार से बातें भी करती रहीं. उनके साथ मौजूद शिष्य पंकज जैन ने इस पूरे वाकये को अपने मोबाइल में कैद कर लिया और सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया, जो अब इंटरनेट पर वायरल हो रहा है.
क्या सच में सांप सुन सकते हैं?
इस वीडियो के सामने आने के बाद बहस छिड़ गई है कि आखिर ऐसा क्यों हुआ. वैज्ञानिक नजरिए से देखें तो सांप एक्टोथर्म यानी ठंडे खून वाले जीव होते हैं. वे अपनी ऊर्जा बचाने या शरीर का तापमान नियंत्रित करने के लिए अक्सर बिल्कुल शांत बैठ जाते हैं. सांप के कान नहीं होते, केवल कंपन महसूस होता है. सांपों के बाहरी कान या ईयरड्रम नहीं होते. वे इंसानी आवाज़ या मंत्रों को हवा के जरिए नहीं सुन सकते, बल्कि अपने जबड़े की हड्डियों के जरिए ज़मीन से आने वाले कम आवृति के कंपनों (seismic waves) को महसूस करते हैं.
जंगली सांप आमतौर पर तभी हमला करते हैं जब उन्हें उकसाया जाए या खतरा महसूस हो. जैन साध्वी (माताजी) बिल्कुल स्थिर बैठी थीं, जिससे सांप को कोई आक्रामक हरकत या भारी कंपन महसूस नहीं हुआ. यही वजह है कि सांप ने भागने या हमला करने के बजाय सिर्फ अपनी रक्षात्मक मुद्रा (फन उठाकर) में रहना बेहतर समझा. मंत्रों या संगीत से सांपों के ‘मोहित’ होने का विज्ञान कोई सबूत नहीं मानता.
Jain Sadhvi’s 😯
आपकी क्या राय है? सड़क पर सांप से संवाद! pic.twitter.com/TPrzL9EwQl
— Shahadat (@ShahSheikh19) August 2, 2026
बेहद खास हैं इसके पीछे के आध्यात्मिक मायने
आध्यात्मिक दृष्टिकोण से श्रद्धालु इसे अहिंसा और संतों की ऊर्जा का कमाल मान रहे हैं. जैन मान्यताओं और परंपरा के अनुसार, सच्चे संतों की करुणा और शांति का प्रभाव आसपास के जीव-जंतुओं पर भी पड़ता है. भक्त प्रदीप जैन का कहना है कि संतों के जीवन में अहिंसा सिर्फ एक शब्द नहीं, बल्कि उनकी ऊर्जा का हिस्सा है, जिसके प्रभाव से विषधर भी शांत हो गया.
जैन धर्म में अहिंसा को सबसे बड़ा धर्म माना गया है. ऐसा विश्वास है कि जैन संत-साध्वी जब पूरी तरह से करुणा और आंतरिक शांति के भाव में होते हैं, तो उनके आसपास का वातावरण भी शांत हो जाता है. भक्त इस घटना को प्राचीन पौराणिक कथाओं से भी जोड़कर देख रहे हैं, जैसे भगवान पार्श्वनाथ से जुड़ी कथाएं, जहां संतों की उपस्थिति और पवित्र मंत्रों से जीवों को शांति और सुरक्षा का अहसास होता है. विज्ञान इसे भले ही संयोग या जीव की सहज प्रकृति माने, लेकिन आस्था की दुनिया में इसे एक अलोकौकिक क्षण माना जा रहा है.