Who Was ‘Mowgli Girl’ Ehsaas: एक बार फिर मोगली की चर्चा हुई शुरू, जी हां एक 18 साल की लड़की जिसे भारत में कई लोग सिर्फ ‘मोगली गर्ल’ के नाम से जानते थे. ये बच्ची जंगल के बीच अकेली मिली थी और इसकी कहानी ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा था. लेकिन इस नाम के पीछे एक मासूम बच्ची एहसास की जिंदगी छिपी थी, जिसने बचपन से ही मुश्किल हालात का सामना किया.
उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले स्थित Katarniaghat Wildlife Sanctuary के जंगलों में मिलने के बाद ‘एहसास’ की जिंदगी पूरी तरह बदल गई. करीब नौ साल तक देखभाल और पुनर्वास के बाद 18 साल की उम्र में लखनऊ में डॉ . राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में उसका निधन हो गया.
कौन थी ‘मोगली गर्ल’ एहसास? (Who Was ‘Mowgli Girl’ Ehsaas)
जनवरी 2017 में एहसास पहली बार चर्चा में आई थी. उसे उत्तर प्रदेश के कतर्नियाघाट वन्यजीव अभयारण्य के मोतीपुर रेंज में सड़क किनारे भटकते हुए देखा गया था. तब वो दुनियादारी से काफी अनजान थी उन्हें कुछ पता नहीं था. वो लोगों से दूरी बनाती थी, चार पैरों पर चलती थी, कपड़े पहनने से इनकार करती थी और अपनी बात इशारों और आवाजों के जरिए कहती थी.
उसके व्यवहार को देखकर लोगों ने उसकी तुलना रुडयार्ड किपलिंग की फेमस कहानी के किरदार मोगली से करनी शुरू कर दी, जिसके बाद उसे ‘मोगली गर्ल’ कहा जाने लगा.
रेस्क्यू के बाद शुरू हुआ नई जिंदगी का सफर
बचाव के बाद बाल कल्याण समिति ने उसका नाम पहले पूजा रखा था. बाद में उसका नाम बदलकर एहसास कर दिया गया. इसके बाद उसे लखनऊ के मोहन रोड स्थित Nirvan Foundation से जुड़े स्पेशल बाल गृह में रखा गया, जहां उसकी लंबे समय तक देखभाल की गई.
धीरे-धीरे इलाज, प्रशिक्षण और प्यार भरी देखभाल से एहसास ने इंसानी दुनिया के साथ तालमेल बैठाना शुरू किया. उसने कपड़े पहनना सीखा, अपने देखभाल करने वालों को पहचानना शुरू किया और भावनाएं भी व्यक्त करने लगी.
देखभाल करने वाली रानी बनीं खास सहारा
एहसास के जीवन में उसकी देखभाल करने वाली रानी की खास जगह थी. वो उन्हें प्यार से ‘अम्मा’ कहकर बुलाती थी. रानी ने बताया कि उन्हें हमेशा उम्मीद थी कि एहसास आगे और बेहतर हो पाएगी. उसके जाने के बाद अब उनके पास सिर्फ उसकी यादें रह गई हैं.
क्या हुआ था एहसास को?
पुनर्वास के बावजूद एहसास की स्वास्थ्य समस्याएं बनी रहीं. डॉक्टरों के अनुसार, उसका मस्तिष्क पूरी तरह सही नहीं हो पाया था, जिसके कारण उसे काफी दिमागी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा. इसके अलावा उसे मिर्गी के दौरे भी आते थे और वो लंबे समय से इलाज पर थी. जून 2026 में तबीयत बिगड़ने के बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था. कुछ सुधार होने पर उसे छुट्टी दे दी गई, लेकिन 15 जून को उसकी हालत फिर सीरियस हो गई. उसे फिर से जब अस्पताल ले जाया गया तो वहां पर उसकी मौत हो गई. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, फेफड़ों की बीमारी के कारण हुए इंफेक्शन (सेप्टीसीमिया) को उसकी मौत की वजह बताया गया.