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UP Chunav 2027: यूपी में कितनी बार हुआ ‘मुलायम बनाम मुलायम’ का मुकाबला? खुद की पहचान बताने के लिए जोड़ना पड़ा पिता का नाम

UP Chunav 2027: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कई बार मुलायम सिंह यादव को अपने हमनाम वाले उम्मीदवारों का सामना करना पड़ा. एक बार तो ऐसा हुआ कि उन्हें अपनी पहचान बताने के लिए अपने नाम के साथ पिता का नाम जोड़ना पड़ा.

By: Sohail Rahman | Published: October 4, 2026 1:53:13 PM IST



UP Chunav 2027: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव (UP Chunav 2027) को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं. ऐसे में आज हम आपको चुनावी किस्से से जुड़ी एक ऐसी कहानी बताएंगे. जहां मुलायम सिंह यादव के सामने उनके ही सेम नाम वाले 2 और उम्मीदवार सामने आ गए थे. जिसके बाद उन्हें अपने नाम के साथ पिता का नाम जोड़ना पड़ा. ये 1989 के विधानसभा चुनाव की बात है, जब मुलायम को पहली बार अपनी ‘असली चुनावी’ पहचान साबित करने के लिए अपने नाम के साथ पिता (सुघर सिंह) का नाम जोड़ना पड़ा था.

ऐसा तब हुआ जब यादव परिवार के गढ़ माने जाने वाले जसवंतनगर विधानसभा क्षेत्र से उनके ही नाम वाले एक व्यक्ति ने उन्हें चुनौती दी थी. 1989 के बाद 1991 और 1993 के विधानसभा चुनावों में भी यही स्थिति बनी रही.

फिर भी सपा के पूर्व अध्यक्ष को मिली जीत

चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, 1989 में जनता दल ने सुघर सिंह के बेटे मुलायम सिंह यादव को मैदान में उतारा था. उन्हें पट्टीराम के बेटे मुलायम सिंह यादव से चुनौती मिली, जो निर्दलीय उम्मीदवार थे. इस चुनाव में मुलायम सिंह यादव को 65,597 वोट (59.26%) मिले, जबकि उनके नाम वाले दूसरे उम्मीदवार को सिर्फ 1,032 वोट (0.93%) ही मिल पाए. 1991 में भी यही स्थिति रही. जनता पार्टी के चुनाव चिह्न पर लड़ते हुए मुलायम ने जसवंतनगर से 47,765 वोट (45.96%) हासिल करके जीत दर्ज की, जबकि उनके नाम वाले दूसरे उम्मीदवार को सिर्फ 328 वोट ही मिले.

इस चुनाव में बरौली विधानसभा क्षेत्र से एक और मुलायम सिंह सामने आए, जो निर्दलीय उम्मीदवार थे. उन्हें सिर्फ 218 वोट (0.25%) ही मिल पाए.

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1993 में 3 सीटों से चुनाव लड़े थे मुलायम सिंह यादव

1993 के यूपी विधानसभा चुनावों में मुलायम ने तीन विधानसभा सीटों – जसवंतनगर (इटावा), शिकोहाबाद (फिरोजाबाद) और निधौली कलां (एटा) – से चुनाव लड़ा और समाजवादी पार्टी के टिकट पर सभी सीटें जीतीं. तब तक समाजवादी पार्टी बन चुकी थी और राम मंदिर आंदोलन के बाद चुनाव हुए थे. हालांकि, नेता जो को तीनों विधानसभा सीटों पर अपने ही नाम वाले लोगों से चुनौती का सामना करना पड़ा.

तीनों सीटों पर मिली जीत

  • जसवंतनगर में मुलायम को सबसे ज्यादा 60,242 वोट (46.88%) मिले, जबकि उनके नाम वाले निर्दलीय उम्मीदवार को 192 वोट (0.15%) मिले.
  • शिकोहाबाद में मुलायम को 55,249 वोट (42.43%) मिले, जबकि उनके नाम वाले उम्मीदवार (रुस्तम सिंह के बेटे मुलायम सिंह यादव) को 154 वोट (0.12%) मिले.
  • इसी तरह, निधौली कलां में मुलायम सिंह यादव को 41,683 वोट मिले, जबकि उनके नाम वाले निर्दलीय उम्मीदवार को सिर्फ 184 वोट मिले.
  • अलीगढ़ की बरौली विधानसभा सीट पर भी एक और हमनाम मुलायम सिंह सेहरा ने चुनाव लड़ा, जिन्हें सिर्फ 164 वोट मिले.

1985 के चुनाव में भी हमनाम ने लड़ा चुनाव

1985 के विधानसभा चुनावों के दौरान मुलायम ने जसवंतनगर से लोक दल के टिकट पर जीत हासिल की, जबकि उनके नाम वाले एक व्यक्ति ने औरैया से चुनाव लड़ा. उस हमनाम को सिर्फ 292 वोट मिले. मुलायम सिंह यादव 1980 में चौधरी चरण सिंह की अगुवाई वाली जनता पार्टी (सेक्युलर) के टिकट पर जसवंतनगर से विधानसभा चुनाव नहीं जीत पाए थे. हालांकि, उनके नाम वाले एक व्यक्ति (मुलायम सिंह) ने भरथना से इंडियन नेशनल कांग्रेस (U) के टिकट पर चुनाव लड़ा और उन्हें 2,367 वोट मिले. दिलचस्प बात यह है कि मुलायम सिंह यादव के यूपी की चुनावी राजनीति में आने से पहले ही 1951 में एक निर्दलीय उम्मीदवार मुलायम सिंह ने गुन्नौर नॉर्थ विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था और उन्हें 2,944 वोट मिले थे.

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