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UP Chunav 2027: इसौली सीट पर मुलायम का फॉर्मूला 20 साल से हिट, 2017 में मोदी लहर भी रही नाकाम

UP Chunav 2027: यदि 1977 से 2022 तक के पिछले 12 विधानसभा चुनावों के आंकड़ों पर नजर डालें, तो इस सीट पर किसी एक दल का स्थाई वर्चस्व नहीं रहा, लेकिन 2002 के बाद से तस्वीर पूरी तरह बदल गई:

By: JP Yadav | Published: September 1, 2026 12:38:31 PM IST



UP Chunav 2027: उत्तर प्रदेश की इसौली विधानसभा सीट पिछले कई दशकों से समाजवादी पार्टी का गढ़ रही है. इस सीट पर कांग्रेस, भाजपा और बहुजन समाज पार्टी समेत अन्य दलों ने भी बाजी मारी है, लेकिन समाजवादी पार्टी के उम्मीदवारों ने अधिक  जीत हासिल की है. पिछले करीब 2 दशक से यह सपा के गढ़ में शामिल मानी जाती है.बहुत कम लोगों को जानकारी होगी कि श्रीपति मिश्र ने इसौली विधानसभा सीट से ही चुनाव जीतकर विधायक बने और 19 जुलाई 1982 से 2 अगस्त 1984 तक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे. 

पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यहां का दौरा करके अपने समर्थकों में ऐसा जोश भरा कि सुल्तानपुर की यह सीट समाजवादी पार्टी का गढ़ बन गई. दरअसल, मुलायम सिंह यादव ने इस सीट पर  ‘मुस्लिम- यादव’ (MY) समीकरण को कुछ इस तरह बना दिया कि यह सपा का गढ़ बन गया. भारतीय जनता पार्टी की 2017 की प्रचंड ‘मोदी लहर’ भी इसे हिला नहीं सकी और समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी ने यहां से आसानी से जीत हासिल की. वर्ष 2002 से लेकर 2022 तक यानी 2 दशक तक इसौली की जनता ने लगातार 5 विधानसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी की साइकिल और उसके प्रत्याशियों पर ही भरोसा जताया है.

2022 में 300 से भी कम वोटों से जीती सपा

यूपी विधानसभा चुनाव 2022 में इसौली सीट पर समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशियों के बीच रोचक मुकाबला देखने को मिला. सपा से मोहम्मद ताहिर खान ने सिर्फ 269 वोट से भाजपा के ओम प्रकाश पांडे ‘बजरंगी’ को चुनाव हरा दिया.

क्या है जातीय गणित?

इसौली में चंद्रभद्र सिंह ‘सोनू’ और उनके भाई यशभद्र सिंह ‘मोनू’ का खासा प्रभाव है. दोनों यहां से सांसद और विधायक भी रह चुके हैं. सोनू सिंह ने खुद 2002 और 2007 में सपा के टिकट पर जीत हासिल की. सोनू सिंह के पिता इन्द्रभद्र सिंह भी इस सीट से 2 बार विधायक रह चुके हैं.

राजनीति के जानकारों की मानें तो बहुजन समाज पार्टी का पारंपरिक कैडर वोट अगर पूरी तरह बहुजन समाज पार्टी के साथ है तो सपा को इसका सीधा फायदा मिलता है. दरअसल, सवर्ण और पिछड़ा वोट बंट नहीं पाता. इस दौरान अगर दलित वोट भाजपा या सपा की ओर शिफ्ट होता है, तो समीकरण तुरंत बदल जाते हैं. सपा की जीत की एक बड़ी वजह है- MY समीकरण.  इसौली सीट पर सपा अपने ‘MY’ समीकरण को बचाए रखने में सफल रहती है और जीत हासिल कर लेती है. 

यह भी जानें

  •  पहले चुनाव में कांग्रेस के नाजिम अली विधायक जीते
  • 1957  में जनसंघ के गयाबख्श सिंह ने जीत हासिल की.
  •  1962 में कांग्रेस के रामबली मिश्र को विजय मिली.
  •  1969 में भारतीय क्रांति दल के रामजियावन दुबे ने जीत का स्वाद चखा.
  •  1974 में कांग्रेस के अम्बिका सिंह को जीत मिली.
  •  1975 में जनता पार्टी के रामबरन वर्मा ने चुनाव जीता. 
  • 1980 में कांग्रेस के श्रीपति मिश्र इस सीट से विधायक निर्वाचित हुए और वह 1982 में प्रदेश के मुख्यमंत्री भी बने. 
  •  1985 में कांग्रेस के जय नारायन तिवारी जीते.
  •  1989 में जनता दल के टिकट पर विजयी हुए.
  •  1993 में निर्दल लड़कर इन्द्रभद्र सिंह विधानसभा में पहुंचे. 
  • 1996  बसपा के जय नारायन तिवारी ने इन्द्रभद्र सिंह को हरा दिया. 
  • 2002 के विधानसभा चुनाव में इन्द्रभद्र सिंह के पुत्र चन्द्रभद्र सिंह सोनू सपा के टिकट पर जीते.
  •  2007 में सोनू बसपा के टिकट पर भी विधायक बने.
  •  2012 में सपा के अबरार अहमद इस सीट से जीते. 
  • 2017 के विधानसभा चुनाव में भी अबरार अहमद ही जीते. 
  • 2022 के चुनाव में सपा के मोहम्मद ताहिर खान ने जीत हासिल की. 

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