UP Chunav 2027: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव अब नजदीक हैं. 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं. वहीं यूपी में अब सभी दिग्गज पार्टियां चुनाव की तैयारियों में जुट चुकी हैं. लेकिन आज हम आपको उत्तर प्रदेश के एक ऐसे चुनाव के बारे में बताने जा रहे हैं जिसमें वोटों की गिनती तीन दिनों तक चली थी. इतना ही नहीं, ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी बुखार से बीमार पड़ गए थे और 90 प्रतिशत उम्मीदवारों की ज़मानत राशि ज़ब्त हो गई थी. जी हाँ! ये एक ऐसा चुनाव था जो काफी मुश्किल दौर से गुजरा था. यह एक ऐसा रिकॉर्ड है जो आज भी कायम है. दरअसल ये सब 1993 के चुनावों में हुआ था.
हर सीट पर उतरे 23 उम्मीदवार
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 1993 का चुनाव बेहद मुश्किल दौर सेव गुजरा. दरअसल, उस दौरान उत्तर प्रदेश में 422 सीटें थीं जो आज की तुलना में 19 ज़्यादा हैं. बीजेपी ने सभी 422 सीटों पर उम्मीदवार उतारे, जबकि कांग्रेस ने 421 सीटों पर चुनाव लड़ा. बीएसपी और एसपी ने मिलकर चुनाव लड़ने का फैसला किया; बीएसपी ने 164 सीटों पर और एसपी ने 256 सीटों पर उम्मीदवार उतारे. बता दें कि चार पार्टियों कांग्रेस, बीएसपी, बीजेपी और एसपी ने कुल मिलाकर 1,263 उम्मीदवार उतारे. लेकिन, निर्दलीय उम्मीदवार एक कदम और आगे निकल गए; इतने सारे लोगों ने नामांकन दाखिल किया कि उनकी कुल संख्या 9,716 तक पहुंच गई. औसतन, हर सीट पर 23 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे थे.
आगरा कैंट से अनोखा चुनावी नजारा
सबसे खास और हैरान कर देने वाली बात तो ये है कि सिर्फ आगरा कैंट सीट से ही लगभग 77 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया. जैसे ही इस सीट पर वोटिंग खत्म हुई वैसे ही चुनाव ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी काम पर लग गए और उन्हें बहुत मुश्किल दौर से गुजरना पड़ा. हैरान कर देने वाली बात ये है कि इस चुनाव में गिनती की प्रक्रिया तीन दिनों तक चली और कहा जाता है कि कुछ कर्मचारियों को बुखार भी आ गया था.
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EC को लेना पड़ा था बड़ा एक्शन
वहीं चुनाव में वोटों की गिनती और नतीजे घोषित होने के बाद इलेक्शन कमीशन को बड़ा एक्शन लेना पड़ा था. इस चुनाव में बीजेपी ने 177 सीटें, बीएसपी ने 67, एसपी ने 109 और कांग्रेस ने 28 सीटें जीतीं. इन चार पार्टियों ने कुल 381 सीटें हासिल कीं, वहीं 41 सीटें छोटी पार्टियों और निर्दलीय उम्मीदवारों के खाते में गईं. 1993 के चुनाव में हैरान कर देने वाली बात ये है कि इलेक्शन कमीशन ने एक बड़ा एक्शन लिया और 8,645 उम्मीदवारों की ज़मानत राशि ज़ब्त कर ली. इसके बाद कभी भी इतनी बड़ी संख्या में उम्मीदवारों ने चुनाव नहीं लड़ा. बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी लेकिन सरकार बनाने में नाकाम रही.