रसड़ा विधानसभा क्षेत्र से बसपा (BSP) विधायक उमाशंकर सिंह के निधन की खबर सामने आते ही बुधवार रात पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई. नगरा ब्लॉक के खनवार गांव के रहने वाले उमाशंकर सिंह लगातार तीन बार से रसड़ा के विधायक थे. वह लंबे समय से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे और उनका इलाज चल रहा था.
इससे पहले फरवरी 2026 में भी उनकी सेहत को लेकर खबरें सामने आई थीं. जैसे ही उनके निधन की खबर फैली, रसड़ा और पूरे बलिया क्षेत्र में उनके समर्थकों और शुभचिंतकों के बीच सन्नाटा पसर गया. विधायक उमाशंकर सिंह के जाने की पुष्टि के बाद से पूरे इलाके में मातम का माहौल है.
उमाशंकर सिंह कौन थे?
उमाशंकर सिंह को पूर्वांचल की राजनीति में बसपा (BSP) का सबसे कद्दावर और असरदार चेहरा माना जाता था. उनका जन्म 2 जनवरी 1971 को उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के खनवार गांव में एक साधारण किसान परिवार में हुआ था. उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई एक सरकारी स्कूल से की और आगे की पढ़ाई के लिए बलिया के कॉलेज पहुंचे, जहाँ से छात्र संघ राजनीति के जरिए उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की.
लगातार तीन बार चुने गए विधायक
इसके बाद, साल 2000 में वे जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीते और आगे चलकर जिला पंचायत अध्यक्ष बने. उमाशंकर सिंह बलिया जिले की रसड़ा विधानसभा सीट से लगातार तीन बार विधायक चुने गए. वे पहली बार 2012 में बसपा के टिकट पर विधायक बने थे. इसके बाद 2017 और 2022 के चुनावों में, जब पूरे प्रदेश में बीजेपी की प्रचंड लहर थी, तब भी उन्होंने अपनी सीट पर जीत का परचम लहराया. 2022 में तो जब पूरे उत्तर प्रदेश में बसपा का सूपड़ा साफ हो गया था, तब उमाशंकर सिंह ही अकेले ऐसे नेता थे जिन्होंने रसड़ा सीट बचाए रखी और विधानसभा में पार्टी के इकलौते विधायक बने.
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