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चुनाव में अतीक अहमद को राजू पाल ने दी थी चुनौती, गुर्गों ने गोलियों से कर दिया छलनी, फिर पत्नी पूजा ने हराकर लिया बदला

Raju Pal Murder Case: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में राजू पाल की अतीक अहमद के गुर्गों ने हत्या कर दी थी. इसके बाद पूजा पाल ने 2007 में अतीक अहमद के भाई अशरफ को हराया, फिर 2012 के चुनाव में अतीक अहमद को हराया.

By: Sohail Rahman | Published: June 9, 2026 4:02:01 PM IST



Raju Pal legacy: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में साल 2005 की सर्दियों के एक ठंडे दिन युवा पूजा पाल अपने घर पर अपने पति राजू पाल का इंतज़ार कर रही थीं. नई-नवेली दुल्हन को उस त्रासदी का जरा भी अंदाजा नहीं था जो कुछ किलोमीटर दूर होने वाली थी और उसकी जिंदगी हमेशा के लिए बदलने वाली थी. दरअसल, शार्पशूटर्स का एक ग्रुप बीएसपी विधायक की कार का पीछा कर रहा था, जिसे उनके साले उमेश पाल चला रहे थे. जिसका मकसद राजू पाल की हत्या करना नहीं ता बल्कि ऐसा संदेश देना था जिसे लंबे समय तक भुलाया न जा सके.

घबराए हुए उमेश ने टाटा क्वैलिस गाड़ी रोकी.  पीछे से आ रहे हमलावरों ने जनवरी की शांति को भंग करते हुए अपनी असॉल्ट राइफ़लों से गाड़ी पर गोलियों की बौछार कर दी. जिसकी वजह से पूरा इलाका गोलियों की तड़तड़ाहट की आवाजों से गूंज उठा. इस अफरा-तफरी के बीच कुछ समर्थक राजू के गोलियों से छलनी शरीर को एक टेम्पो में डालकर अस्पताल ले जाने में कामयाब रहे.

हमलावरों ने किया पीछा

लेकिन हमलावरों ने पीछा करके टेम्पो को ढूंढ लिया और और भी कई गोलियां चलाकर बेजान शरीर को छलनी कर दिया. हालांकि, इस गोलीबारी में उमेश बच गए. लेकिन पूजा ने अपने पति को खो दिया था, जिनसे उनकी शादी को कुछ ही दिन हुए थे; उन पर कुछ आपराधिक मामले भी चल रहे थे. इस गोलीबारी में उनके दो सुरक्षा गार्ड भी मारे गए. आरोप था कि इलाहाबाद के पास फूलपुर से सत्ताधारी समाजवादी पार्टी (SP) के सांसद और डॉन अतीक अहमद ने इस हत्या की साज़िश रची थी और गोली चलाने वालों में उसका भाई अशरफ भी शामिल था.

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राजू पाल ने अतीक अहमद को चुनाव में दी थी चुनौती

अतीक लगातार पांच बार इलाहाबाद वेस्ट से जीता था और जब वह 2004 में सांसद बना तो उसे लगा कि अशरफ आसानी से खाली हुई सीट पर उपचुनाव जीत जाएगा. लेकिन अशरफ नहीं जीत पाया. बीएसपी के राजू पाल जीते और यह जीत अतीक के लिए बहुत बड़ी बेइज्जती थी. जिसको अतीक अहमद बर्दाश्त नहीं कर सके और उन्होंने राजू पाल की हत्या कर दी.

पूजा पाल राजू पाल की विरासत को कैसे बढ़ा रही आगे?

राजू पाल की हत्या होने के बाद पूजा पाल ने बीएसपी के टिकट पर चुनाव लड़ा. हालांकि उन्हें हार मिली. लेकिन उन्हें काफी समर्थन मिला. इसके बाद 2007 के विधानसभा चुनाव में अशरफ को हराया. इसके बाद 2012 के विधानसभा चुनाव में अतीक अहमद खूद मैदान में उतरे, लेकिन पूजा पाल ने उन्हें भी हरा दिया. इसके बाद पूजा पाल 2019 में समाजवादी पार्टी में शामिल हो गईं. अब उन्होंने सपा से भी इस्तीफा दे दिया है और बीजेपी से उनकी नजदीकियां बढ़ती हुई नजर आ रही हैं.

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