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प्रतीक यादव की 30 अप्रैल को ही हो जाती मौत! आखिर उस दिन क्या हुआ था? कैसे बची थी जान

Prateek Yadav Death Mystery:  जब तक अंतिम फोरेंसिक और रासायनिक जांच रिपोर्ट नहीं मिल जाती, तब तक उन घावों की प्रकृति के बारे में कोई निश्चित निष्कर्ष नहीं निकाला जाएगा.

By: JP Yadav | Last Updated: May 14, 2026 10:48:54 AM IST



Prateek Yadav Death Mystery: मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव काफी समय से बीमार चल रहे थे. यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव के भाई प्रतीक यादव को 13 दिन में 2 बार दिल का दौरा (हार्ट अटैक) पड़ा, लेकिन दोनों बार वह मौत को मात देने में कामयाब रहे. 30 अप्रैल, 2026 को लखनऊ (यूपी) के चौधरी चरण सिंह एयरपोर्ट पर प्रतीक यादव फ्लाइट से उतरकर VIP लाउंज की तरफ आ रहे थे. इसी दौरान उन्हें सीने में तेज दर्द उठा था. यहां पर चक्कर आने से चलते-चलते गिर पड़े थे. इस दौरान पत्नी अपर्णा साथ थी और उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी जान बच पाई. इसके बाद बुधवार (13 मई, 2026) को सुबह दूसरी बार हार्ट अटैक आया तो उन्हें मदद नहीं मिली और उनकी जान चली गई.

उधर, डॉक्टरों का कहना है कि प्रतीक यादव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला है कि उनकी मौत फेफड़ों की रक्त वाहिकाओं में भारी रुकावट के कारण हुई. इसके चलते उनके दिल और श्वसन तंत्र ने काम करना बंद कर दिया था. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि डॉक्टरों ने हिस्टोपैथोलॉजिकल जांच के लिए दिल और फेफड़ों से मिले खून के थक्के जैसे पदार्थ को फॉर्मेलिन में सुरक्षित रख लिया है.

‘मौत’ को लेकर सस्पेंस

इसके साथ ही किसी भी अन्य चिकित्सीय या विषाक्तता से जुड़े कारणों की संभावना को खत्म करने के लिए फोरेंसिक प्रक्रिया के तहत शरीर के अंदरूनी अंगों (viscera) के नमूने भी सुरक्षित रखे गए हैं और रासायनिक विश्लेषण के लिए भेजे गए हैं. सूत्रों ने बताया कि फोरेंसिक विशेषज्ञ अब सुरक्षित रखे गए नमूनों पर प्रयोगशाला परीक्षण करेंगे ताकि खून के थक्के की सटीक प्रकृति और उसके बनने के कारण का पता लगाया जा सके. यह निर्धारित किया जा सके कि क्या किसी अंतर्निहित चिकित्सीय स्थिति या बाहरी कारक ने मौत में योगदान दिया है. 

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आगे यह भी बताया गया है कि शरीर पर पाए गए सभी घाव “एंटीमॉर्टम” (antemortem) थे, जिसका अर्थ है कि वे मौत से पहले हुए थे.   कुल मिलाकर शरीर पर छह एंटीमॉर्टम घाव पाए गए. इनमें से तीन घाव पांच से सात दिन पुराने थे और बाकी तीन लगभग एक दिन पुराने. इन घावों के बारे में कोई स्पष्टीकरण नहीं मिल पाया है.

लखनऊ स्थित मेदांता अस्पताल के मेडिसिन विभाग की एसोसिएट डायरेक्टर रुचिता शर्मा ने बताया कि प्रतीक का इलाज हाइपरटेंशन (उच्च रक्तचाप) और पल्मोनरी एम्बोलिज्म के लिए चल रहा था. उनके मुताबिक वह लंबे समय से उनका इलाज कर रही थीं. वह उच्च रक्तचाप और हाइपरटेंशन से जुड़ी समस्याओं से पीड़ित थे. रुचिता शर्मा के मुताबिक, कुछ दिन पहले प्रतीक को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जब उनमें पल्मोनरी एम्बोलिज्म का पता चला था. यह एक गंभीर स्थिति है जो तब उत्पन्न होती है जब फेफड़ों की धमनियों में खून का थक्का फंस जाता है.

सांस लेने की दिक्कत थी

 रुचिता शर्मा ने यह भी जानकारी दी कि फेफड़ों में रुकावट के कारण उनके दिल के कामकाज पर बुरा असर पड़ा था. कुछ हफ़्ते पहले वह सांस लेने में दिक्कत और उससे जुड़ी अन्य जटिलताओं की शिकायत लेकर हमारे पास आए थे और जांच के दौरान उनमें पल्मोनरी एम्बोलिज्म का पता चला. डॉ. रुचिता शर्मा ने बताया कि प्रतीक खून पतला करने वाली दवाएं ले रहे थे और अपनी चिकित्सीय स्थिति से पूरी तरह अवगत थे.

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